Kis Bimari Me Kharrate Aate Hain: ऐसे कितने ही लोग हैं जो रातभर खर्राटे लेते हैं. खर्राटे लेने को अक्सर ही आम समस्या समझा जाता है. अक्सर लोगों को लगता है कि खर्राटे का सिर्फ एक दुष्प्रभाव है और वो यह है कि खर्राटे लेने वाले व्यक्ति के आस-पास सो रहे व्यक्ति की नींद उड़ जाती है. लेकिन, खर्राटे की दिक्कत आम समस्या भर नहीं है बल्कि गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकती है. यशोदा मेडिसिटी के पल्मोनोलॉजिस्ट और रेस्पिरेटरी मेडिसिन एंड इंटर्वेंशनल पल्मोनोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. राजेश कुमार गुप्ता बता रहे हैं किस स्थिति में खर्राटे खतरनाक होते हैं, इस बीमारी को कैसे पहचाना जा सकता है और क्या करने पर राहत मिल सकती है.
खर्राटे किस बीमारी का संकेत हो सकते हैं

2 / 7
अगर खर्राटे लेने के दौरान बार-बार सांस रुकती है तो यह स्लीप एपनिया का लक्षण हो सकता है. यह एक गंभीर बीमारी है जो खासतौर से पुरुषों में देखी जाती है. समय रहते अगर स्लीप एपनिया का इलाज ना कराया जाए तो यह आगे चलकर दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और याद्दाश्त से जुड़ी दिक्कतों का कारण बन सकता है.
पुरुषों में क्यों अधिक होता है खतरा

3 / 7
मोटापा, गर्दन के आसपास अधिक चर्बी, धूम्रपान, शराब का सेवन और बढ़ती उम्र पुरुषों में स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ा देते हैं. 40 वर्ष की आयु के बाद इसका जोखिम और अधिक हो जाता है. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या टाइप-2 डायबिटीज है उनमें भी यह समस्या अधिक देखी जाती है.
हो सकती हैं ये दिक्कतें

4 / 7
स्लीप एपनिया के कारण व्यक्ति को पर्याप्त और गहरी नींद नहीं मिल पाती है जिस कारण दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस में कमी, याददाश्त कमजोर होना और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने जैसे लक्षण देखे जाते हैं. कुछ मामलों में अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं.
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

5 / 7
तेज और लगातार खर्राटे आना, सोते समय सांस रुकना या हांफकर उठना, सुबह सिरदर्द होना दिनभर अत्यधिक नींद आना, ध्यानकेंद्रित करने में कठिनाई, सुबह मुंह सूखना या गला खराब रहना वगैरह दिक्कतें कभी इग्नोर नहीं करनी चाहिए.
हर खर्राटा नहीं है स्लीप एपनिया

6 / 7
डॉक्टर कहते हैं कि हर खर्राटा स्लीप एपनिया नहीं होता लेकिन तेज खर्राटों के साथ बार-बार सांस रुकना एक गंभीर चेतावनी है. इस स्थिति में शरीर और मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. अगर मरीज को दिनभर नींद आती है, सुबह सिरदर्द रहता है या परिवार के लोग बताते हैं कि नींद में उसकी सांस रुक जाती है तो तुरंत स्लीप स्टडी जैसी जांच करानी चाहिए. समय पर इलाज से इन जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.
कैसे होती है जांच और इलाज

7 / 7
स्लीप एपनिया की पुष्टि के लिए डॉक्टर स्लीप स्टडी (Polysomnography) कराने की सलाह दे सकते हैं. जांच के आधार पर इलाज तय किया जाता है. कुछ मामलों में वजन कम करना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, करवट लेकर सोना और नियमित व्यायाम मददगार हो सकते हैं. गंभीर मामलों में CPAP मशीन के उपयोग या अन्य उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है.
यह भी पढ़ें – शरीर की नसों में गंदा कोलेस्ट्रॉल जमने के क्या लक्षण होते हैं? भूलकर भी इग्नोर ना करें ये Bad Cholesterol Symptoms
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.