दुनिया के वो देश जहां नहीं बहती एक भी नदी, फिर भी कैसे चलता है लाखों लोगों का जीवन?

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में ऐसे भी देश हैं जहां एक भी नदी नहीं बहती? हैरानी की बात ये है कि ऐसे देशों में लाखों लोग रहते हैं और मॉर्डन तकनीक की मदद से अपनी पानी की जरूरतें पूरी करते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही देशों के बारे में.

Countries With No Rivers
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Credit: AI

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बिना नदियों वाले देश

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दुनिया में आमतौर पर नदियां किसी भी देश के जीवन का आधार मानी जाती हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में लगभग 15–20 ऐसे देश हैं जहां एक भी प्राकृतिक नदी नहीं बहती. ये देश या तो बेहद शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों में मौजूद हैं या फिर इतने छोटे द्वीप हैं कि वहां नदी बनने की स्थिति ही नहीं बनती.

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सऊदी अरब

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सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा देश है जहां एक भी नदी नहीं है. यहां का ज्यादातर हिस्सा रेगिस्तान से ढका हुआ है और बारिश बहुत कम होती है. पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ये देश बड़े पैमाने पर समुद्री पानी को साफ करने यानी डिसैलिनेशन तकनीक का इस्तेमाल करता है. इसके अलावा यहां अंडरग्राउंड वॉटर का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शहरों और उद्योगों की पानी की मांग पूरी होती है.

कुवैत, कतर और UAE

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कुवैत, कतर और UAE जैसे देशों में भी कोई स्थायी नदी नहीं है. इन देशों का क्लाइमेट बेहद हॉट एंड ड्राई है, जिसकी वजह से यहां प्राकृतिक जल स्रोत बहुत सीमित हैं. पानी की आपूर्ति के लिए ये देश एड्वांस्ड डिसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं और साथ ही पानी के संरक्षण पर भी खास ध्यान देते हैं, ताकि भविष्य में पानी की कमी से बचा जा सके.

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लीबिया

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लीबिया अफ्रीका का सबसे बड़ा ऐसा देश है जहां एक भी नदी नहीं है. इस देश का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सहारा रेगिस्तान में आता है, जहां बारिश बेहद कम होती है. यहां के लोग मुख्य रूप से अंडर वॉटर सोर्स यानी एक्विफर्स पर निर्भर रहते हैं. इसके अलावा, बड़े स्तर पर पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के जरिए दूर-दराज इलाकों तक पानी पहुंचाया जाता है.

वेटिकन सिटी और मोनाको

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वेटिकन सिटी और मोनाको जैसे छोटे देशों में नदियों का ना होना आम बात है, क्योंकि इनका एरिया बहुत ही सीमित है. यहां नदी बनने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही जल स्रोत. इन देशों की पानी की जरूरतें पड़ोसी देशों से पूरी की जाती हैं और मॉडर्न वॉटर सप्लाई सिस्टम के जरिए नागरिकों तक पानी पहुंचाया जाता है.

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मालदीव, नौरू और तुवालु

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मालदीव, नौरू और तुवालु जैसे छोटे द्वीपीय देशों में भी कोई नदी नहीं है. इन देशों का आकार छोटा है और यहां स्थायी जलधाराएं बनने की संभावना कम होती है. यहां के लोग Rainwater Harvesting और अंडरग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा कुछ जगहों पर समुद्री पानी को भी साफ करके इस्तेमाल में लाया जाता है (All Photos Credit: AI)

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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