आज लगभग हर व्यक्ति स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है, लेकिन एक छोटी-सी लापरवाही बड़े नुकसान की वजह बन सकती है. कई लोग फोन फुल चार्ज होने के बाद भी चार्जर को प्लग में लगा रहने देते हैं. यह आदत मामूली लगती है, लेकिन इससे बिजली की अनावश्यक खपत होती है और इसका असर आपकी जेब के साथ-साथ देश की ऊर्जा व्यवस्था पर भी पड़ता है.
सालभर में बढ़ सकता है बिजली का खर्च

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अगर मोबाइल चार्जर पूरे साल प्लग में लगा रहे, तो फोन चार्ज न होने की स्थिति में भी वह बिजली की खपत करता रहता है. अनुमान है कि एक चार्जर इस तरह सालभर में करीब 150 रुपये तक की बिजली खर्च कर सकता है. यह ऊर्जा धीरे-धीरे "स्टैंडबाय पावर लॉस" के रूप में बर्बाद होती रहती है.
आखिर कैसे होती है बिजली की बर्बादी?

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मोबाइल चार्जर प्लग में लगा रहने पर, भले ही उससे फोन कनेक्ट न हो, फिर भी वह थोड़ी-थोड़ी बिजली खींचता रहता है. इस प्रक्रिया को "वैंपायर पावर" या "फैंटम लोड" कहा जाता है. एक चार्जर की खपत भले ही कम हो, लेकिन करोड़ों डिवाइस मिलकर बड़ी मात्रा में बिजली बर्बाद कर देते हैं.
इन आसान तरीकों से रोकें बिजली की बर्बादी

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इस समस्या से बचना बिल्कुल आसान है. फोन चार्ज होने के बाद चार्जर को तुरंत प्लग से निकाल दें. मल्टी-प्लग स्विच का उपयोग करें ताकि सभी डिवाइस एक साथ बंद किए जा सकें. साथ ही, एनर्जी एफिशिएंट चार्जर इस्तेमाल करें और जिन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की जरूरत न हो, उनका प्लग भी निकालकर रखें.
छोटी आदत, बड़ा फायदा

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अगर लोग चार्जर को इस्तेमाल के बाद प्लग से निकालने की आदत बना लें, तो बड़े स्तर पर बिजली की बचत संभव है. इससे बिजली का बिल कम होगा, देश के ऊर्जा संसाधनों पर दबाव घटेगा और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हर व्यक्ति ऊर्जा बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. (Images Credit-Pexels)