देश में OTP स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और दूसरे साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे मामलों में पीड़ितों को राहत देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक नया सब-पोर्टल लॉन्च किया है. इसका नाम Mobile Restoration Module (MRM) है, जिसके जरिए साइबर फ्रॉड के शिकार लोग ऑनलाइन रिफंड की रिक्वेस्ट कर सकते हैं.
क्या है Mobile Restoration Module (MRM)?

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MRM को इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने लॉन्च किया है. यह नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) का हिस्सा है. इसका मकसद पीड़ितों को बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए बिना घर बैठे रिफंड के लिए आवेदन करने की सुविधा देना है.
50 हजार रुपये से कम रकम पर क्या नियम हैं?

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अगर स्कैमर के बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई कुल राशि 50,000 रुपये से कम है, तो पीड़ित को FIR या कोर्ट ऑर्डर जमा करने की जरूरत नहीं होगी. ऐसे मामलों में पुलिस शिकायत के आधार पर ही रिफंड की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.
कब जरूरी होगी FIR और कोर्ट ऑर्डर?

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अगर किसी एक बैंक अकाउंट में फ्रीज की गई राशि 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो रिफंड के लिए FIR दर्ज कराना जरूरी होगा. आवेदन के बाद पुलिस पोर्टल पर जरूरी दस्तावेज और नोटिस अपलोड करेगी. इसके बाद संबंधित बैंक सीधे पीड़ित के खाते में रकम ट्रांसफर करेगा. (Image Credit- AI)
रिफंड के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

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MRM पोर्टल पर आवेदन करने से पहले बैंक अकाउंट नंबर, पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी, 14 अंकों की Complaint ID और NCRP में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर तैयार रखें. जरूरत पड़ने पर कोर्ट ऑर्डर की कॉपी भी अपलोड करनी पड़ सकती है. (Image Credit- AI)
ऐसे करें MRM पोर्टल पर रिफंड के लिए आवेदन

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सबसे पहले MRM पोर्टल पर जाएं और Citizen Login विकल्प चुनें. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP की मदद से लॉगिन करें. इसके बाद Raise Refund Request सेक्शन में जाकर 14 अंकों की Complaint ID दर्ज करें. फिर पैन कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड भरकर आवेदन सबमिट करें. (Image Credit- AI)
आवेदन के बाद कैसे ट्रैक करें स्टेटस?

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रिफंड रिक्वेस्ट जमा होने के बाद पोर्टल एक यूनिक Request ID जनरेट करेगा, जिसकी शुरुआत "MR2026" से होगी. इसी आईडी की मदद से यूजर अपने रिफंड आवेदन का स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे. (Image Credit- AI)