अगर आप अपनी बाइक या स्कूटर में बदलाव कराने के शौकीन हैं, तो अब सावधान हो जाइए. नए मोटर व्हीकल नियमों के तहत टू-व्हीलर्स में गैर-कानूनी मॉडिफिकेशन कराना महंगा पड़ सकता है. साइलेंसर, फैंसी लाइट्स या चौड़े टायर जैसे बदलाव अब सीधे कानून के दायरे में आ गए हैं. यदि वाहन में लगे पार्ट्स ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) से प्रमाणित नहीं हैं, तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.
पहली गलती पर ₹5,000, दूसरी बार ₹10,000 जुर्माना

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नियमों के मुताबिक, पहली बार अवैध मॉडिफिकेशन वाली गाड़ी पकड़े जाने पर 5,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है. यदि वही वाहन दोबारा ऐसे ही बदलावों के साथ पकड़ा जाता है, तो जुर्माना बढ़कर 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है. यानी बार-बार नियम तोड़ना और ज्यादा महंगा साबित होगा.
इन बदलावों पर रहेगी पुलिस की खास नजर

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तेज आवाज वाले साइलेंसर, पटाखे जैसी आवाज निकालने वाले एग्जॉस्ट, अत्यधिक चमकदार या रंगीन फैंसी लाइट्स, कंपनी द्वारा तय साइज से ज्यादा चौड़े टायर और सस्पेंशन में बदलाव अब पुलिस की निगरानी में रहेंगे. ऐसे मॉडिफिकेशन सड़क सुरक्षा के लिए खतरा माने जा रहे हैं.
सरकार ने क्यों अपनाया सख्त रुख?

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सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ चालान वसूलने के लिए नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाया गया है. वाहन निर्माता कंपनियां अपने मॉडल्स को कई सुरक्षा और उत्सर्जन परीक्षणों के बाद बाजार में उतारती हैं. अनधिकृत पार्ट्स लगाने से वाहन की मजबूती, ब्रेकिंग और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. ये भी पढ़ें- मैनुअल या ऑटोमैटिक, कार खरीदने से पहले जान लें कौन-सी है आपके लिए बेस्ट
गैराज और मैकेनिक भी नहीं बचेंगे

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नए नियम सिर्फ वाहन मालिकों पर ही लागू नहीं होंगे. यदि कोई गैराज, मैकेनिक या डीलर बिना मंजूरी वाले पार्ट्स बेचता है या उन्हें वाहन में फिट करता है, तो उस पर भी कार्रवाई होगी. ऐसे मामलों में 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
मॉडिफिकेशन से पहले नियम जरूर जानें

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अगर आप अपनी बाइक या स्कूटर में कोई बदलाव करवाने की सोच रहे हैं, तो पहले यह सुनिश्चित कर लें कि इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स अधिकृत और प्रमाणित हों. थोड़ी सी लापरवाही आपको भारी जुर्माना, वाहन जब्ती या RC रद्द होने जैसी परेशानी में डाल सकती है. (Images Credit-AI)