Karwa Chauth Experience: मेट्रो सिटी में रहने वाले पति के पहले ‘करवा चौथ’ की कहानी

Karwa Chauth Experience: करवा चौथ पति के लिए रखा जाता है, लेकिन सुर्खियों में पत्नियां रहती हैं। इस बीच जरा नजर डालिए एक पति के पहले करवा चौथ की इस अनोखी कहानी पर…

Karva Chauth

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Metro City Husband First Karwa Chauth Experience: आज करवा चौथ की खबरें पढ़ते हुए अचानक अपना पहला करवा चौथ याद आ गया तो सोचा कि आप लोगों के साथ वह खूबसूरत पल शेयर करना चाहिए। तो जी, मामला ऐसा है कि घर-परिवार में तो बचपन से ही करवा चौथ का त्योहार मनाते हुए देख रहा हूं। मम्मी-ताई-चाची सभी लोग अपने-अपने पतियों के लिए उपवास रखती थीं, पर जब शादी के पहले साल नोएडा में पत्नी का पहला करवा चौथ आया और उसने एक दिन पहले बताया कि कल पूरे दिन निर्जल व्रत है। पहले तो उसे मना कर दिया, पर जो आपकी बात आसानी से मान जाए तो वह हिन्दुस्तानी पत्नी कैसे हुई? हमें भी लगा कि कोई हमारे लिए पूरा दिन भूखा रहे और हम पेटभर कर खाएं, एन्जॉय करें, तो यह ह्यूमन ग्राउंड्स पर ठीक नहीं तो मैंने भी फैसला किया कि हम भी यह व्रत रख ही लेते हैं और हमने रख लिया।

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पत्नी करवा किसके साथ बदले, यह समस्या हुई

सुबह ऑफिस जाने की जल्दबाजी में पत्नी को बताना मुनासिब नहीं समझा और लंच का टिफिन जानबूझकर फ्रिज में छिपाकर चला गया क्योंकि सुबह-सुबह त्योहार के दिन कोई जिरह नहीं चाहता था। पूरा दिन व्रत रखने के बाद जब शाम को ऑफिस से घर पहुंचा तो देखा कि पत्नी उदास बैठी है। उदासी का कारण पूछा तो पता चला कि अपार्टमेंट में हम लोग नए हैं तो अभी किसी से दोस्ती भी नहीं हुई थी। ऐसे में प्रॉब्लम यह हुई कि वह करवा चौथ की पूजा के दौरान शाम को किसके साथ अपना करवा बदले। जो लोग करवा चौथ के बारे में नहीं जानते हैं, उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि करवा बदलना करवा चौथ की पूजा का एक हिस्सा होता है। इसमें शाम को चांद देखने से पहले महिलाएं एक-दूसरे के साथ करवा बदलती हैं। एक महिला अपना दाहिना पैर दूसरी महिला के बाएं पैर से जोड़ती है और फिर दोनों महिलाएं एक-दूसरे से करवे का चेंजओवर करती हैं।

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कोई सॉल्यूशन नहीं निकला तो खुद मोर्चा संभाला

अब लौटते हैं अपनी प्रॉब्लम पर तो यहां अपन फंस गए। हम भी किसी महिला को जानते नहीं थे सोसायटी में, तो सोचा कि अब इसका क्या समाधान निकाला जाए। पत्नी की ओर देखा तो लगा कि उसे पूरी उम्मीद है कि हम उसकी प्रॉब्लम चुटकियों में सॉल्व कर देंगे, क्योंकि हमने उसे दुखी देख डॉयलॉग जो मारा था कि अरे, यह तो छोटी-सी प्रॉब्लम है, 15 मिनट में सॉल्व कर देंगे, लेकिन यहां मामला उल्टा पड़ गया। एक-दो दोस्तों को फोन किया तो पता चला कि उनके यहां तो करवा चौथ का पर्व मनाया ही नहीं जाता है। ऐसे में उनकी पत्नी कुछ भी मदद नहीं कर सकती। बस फिर क्या था, चूंकि कोई ऑप्शन नजर नहीं आ रहा था तो हमने तय किया कि अब हम खुद ही यह मोर्चा संभालेंगे। पत्नी को जैसे ही बताया कि मेरे साथ करवा बदल लेना, तो वह तपाक से बोली सिर्फ व्रत वाले के साथ ही करवा बदला जा सकता है, तब हमने उसे बताया कि आज हमारा भी व्रत है। आखिरकार हमने उस सीक्रेट से पर्दा हटा दिया कि लंच फ्रिज की वेजिटेबल बकेट में है।

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पता नहीं चलेगा सोच कुछ खाना चाहा, पर खा नहीं पाया

वैसे एक बात उस दिन पता चली कि वाकई पूरे दिन कुछ न खाना और बिना पानी पिए रहना, it’s not a easy job boss। हालांकि लगातार लग रही भूख के बीच मैंने कई बार दिन में कुछ खाने के बारे में सोचा, यह सोचकर कि मेरी पत्नी को पता नहीं चलेगा, लेकिन ज़मीर जो होता है, वह ऐसे ही टाइम पर आपको सही रास्ते पर टिकाए रखता है तो हमने उस दिन वाकई पूरे दिन ऑफिस में कुछ भी नहीं खाया। अब 8 बजने वाले थे, चांद निकलने ही वाला था, पत्नी पूजा करने बैठी और साथ में विराजे हम। पहली बार करवा चौथ की पूजा में शामिल हुआ और फिर उसके साथ 7 बार करवा एक्सचेंज करने की प्रथा पूरी की। फिर जब टेरेस पर जाकर पत्नी ने छलनी से चांद के साथ हमारा मुखड़ा देखा तो वाकई लगा कि इस फिल्म के हीरो हम ही हैं।

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पत्नी की आंखें भर आईं और उसने प्यार का इजहार किया

चांद को अर्घ्य देने के बाद पत्नी को जैसी ही पानी का घूंट पिलाया, उसकी आंखें भर आईं और उसने तुरंत गले लगाकर ‘आई लव यू’ बोल दिया तो बस तभी से चल रहा है हमारा भी करवा चौथ का व्रत। हर साल जब यह व्रत आता है तो यही लगता है कि पति-पत्नी के बीच साल में कई बार बहसबाजी, गुस्सा, रूठना-मनाना तो चलता ही है, पर यह करवा चौथ का व्रत हमेशा पत्नी को अपरहैंड देता है।, इसके करने से उम्र बढ़ती है या नहीं, यह तो पता नहीं, पर पत्नी के प्रति रेस्पेक्ट जरूर बढ़ जाती है।

Wishing an everlasting bond of love and faith to all those who are observing this fast.

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लेखक के बारे में

Abhishek Mehrotra

Abhishek Mehrotra

अभिषेक मेहरोत्रा उन चुनिंदा पत्रकारों में शुमार हैं, जो हमेशा कुछ नया करने और खुद को समय से आगे रखने में प्रयासरत रहते हैं. प्रिंट मीडिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने डिजिटल जर्नलिज्म में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है. बतौर ग्रुप एडिटर डिजिटल News24 से जुड़ने से पहले अभिषेक मेहरोत्रा बिज़नेस वर्ल्ड में डिजिटल एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे. उन्होंने Zee मीडिया में डिजिटल एडिटर के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है. उनकी लीडरशिप में ज़ी न्यूज़ की वेबसाइट न केवल लोगों की पसंदीदा वेबसाइट बनी, बल्कि उसने नंबर 1 न्यूज़ वेबसाइट का मुकाम भी हासिल किया. अभिषेक मेहरोत्रा के कार्यकाल में जी न्यूज़ की वेबसाइट ने 100 मिलियन यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. अभिषेक मेहरोत्रा ने अपना करियर आगरा के स्वराज्य टाइम्स से जर्नलिज्म की पढाई के दौरान शुरू किया। उसके बाद अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के जरिए अपनी पत्रकारिता की पारी को आगे बढ़ाया। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में है जो आज के युग के मीडिया यानी वेब जर्नलिज्म के अच्छे जानकार माने जाते हैं। नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के साथ वेब पत्रकारिता शुरू करने वाले अभिषेक का जागरण डॉट कॉम को एक बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम योगदान रहा है। अभिषेक ने काफी पहले ही वेब वर्ल्ड की बारीकियों को समझ लिया था, क्योंकि वह जानते थे कि पत्रकारिता का भविष्य डिजिटल मीडिया में ही निहित है. आज वह अपनी उस समझ, ज्ञान, अनुभव और खबरों को बेहतर ढंग से समझने के कौशल के बल पर पत्रकारिता के स्तंभ को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने 5 सालों तक मीडिया स्ट्रीम से जुड़ी वेबसाइट समाचार4मीडिया डॉट कॉम में संपादकीय प्रभारी का दायित्व भी निभाया है. मीडिया जगत और वहां के बिजनेस मॉडल पर उनकी पैनी नजर के चलते वे मीडिया विश्लेषक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खबरों की दुनिया के तमात दबाव और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के व्यंगकार को जीवित रखा है. उनके लेख अमर उजाला, आउटलुक हिंदी, चौथी दुनिया में बतौर व्यंग्यकार निरंतर प्रकाशित होते है. राज्यसभा डॉट कॉम और दैनिक जागरण के लिए वे विदेशी और समसमायिक मुद्दों पर लिखने वाले स्थापित कॉलमिनिस्ट हैं।
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