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‘कम खुशी ज्यादा गम, पर Rekha का जीने का जज्बा नहीं हुआ कम; एक्ट्रेस दिलचस्प Case Study

Bollywood Actress Rekha Life: बॉलीवुड एक्ट्रेस रेखा और उनका जीवन अपने आप में एक केस स्टडी है, जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। जिंदगी की असली तस्वीर, जिंदगी जीने का तरीका, सुख दुख सहते हुए भी खुश रहने का जज्बा और हिम्मत, यह सारे सबक उनकी जिंदगी सिखा सकती है।

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Actress Rekha Life Review: बॉलीवुड की सदाबहार एक्ट्रेस रेखा हाल ही में कपिल शर्मा के शो में नजर आईं। वही हंसी, चेहरे पर वही ग्लो, देखकर लगा मानो उनके लिए वक्त थम गया है। कपिल के सवालों पर रेखा के जवाबों से शो में खूब तालियां बजीं, लेकिन तालियों के शोर में अकेलेपन में वो कसक भी महसूस हुई, जो रेखा के दिल में बरसों से है। रेखा की अधूरी प्रेम कहानी की दास्तां दुनिया जानती है, लेकिन इस अधूरेपन से लड़कर अपनी लाइफ को इस मुकाम पर लाने के लिए उन्हें कितना संघर्ष करना पड़ा, इसका उत्तर केवल उन्हीं के पास है।

कल्पना कीजिये आप एक कमरे में हैं और वह कमरा पूरी तरह खाली है। अब चलिए इस इमेजिनेशन को थोड़ा एक्सपेंड करते हैं। कमरे की जगह आप पूरे शहर में अकेले हैं। ऐसा कोई भी नहीं है, जिससे आप अपना सुख-दुःख शेयर कर सकते हैं, जिसके साथ बिना कुछ सोचे खिलखिलाकर हंस सकते हैं। रोना चाहें तो उसके कंधे पर सिर रखकर रो सकते हैं। बिना यह सोचे कि कि वह आपको कैसे जज करेगा?

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रेखा ने कभी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया

पूरी जिंदगी अधूरे प्यार के साये में बिताना, यह इमेजिनेशन ही कितनी दर्दनाक है और रेखा ने इस दर्द को बाकायदा जीया है। एक्ट्रेस रेखा उम्र की उस दहलीज पर हैं, जहां तक पहुंचते-पहुंचते अक्सर लोग लाइफ को लेकर उतने पैशनेट नहीं रहते। उनकी जिंदगी का खालीपन उनकी हर खुशी पर भारी पड़ने लगता है, लेकिन रेखा को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। वह अपनी लाइफ को लेकर आज भी उतनी ही पैशनेट हैं, जितनी उस समय थीं, जब उनकी इनकम्पलीट लव स्टोरी बुनी जा रही थी।

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बॉलीवुड में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे, जहां रिश्ते की डोर के टूटते ही जीवन की डोर भी टूट गई। डिप्रेशन के पीछे नाकाम या अधूरी प्रेम कहानी भी शामिल है। रणबीर कपूर से ब्रेकअप के बाद दीपिका पादुकोण का डिप्रेशन का खतरनाक दौर इसकी बानगी है, मगर रेखा ने दुख और गम की बारिश के बीच भी खुद को कभी इतना कमजोर नहीं होने दिया। रेखा और उनका जीवन अपने आप में एक केस स्टडी है, जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है और अनुभव किया जा सकता है।

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रेखा के जीवन से सीखने को मिला जिंदगी का सच

एक्ट्रेस रेखा के जीवन पर नजर डालें तो भावनाओं के समंदर में खुद को निराशा की लहरों से कैसे बचाए रखना है, यह उनसे सीखा जा सकता है। प्यार मुकम्मल हो या न हो, किसी को शिद्दत से प्यार कैसे किया जा सकता है, यह उनसे सीखा जा सकता है। दुनियाभर के तानों और तंज का सामना खिलखिलाहट के साथ कैसे किया जा सकता है, यह उनसे सीखा जा सकता है।

स्टारडम के शिखर पर बैठकर भी पैर जमीं पर कैसे रखे जा सकते हैं, यह भी उनसे सीखा जा सकता है। रेखा ने मजबूती के साथ अपनी लाइफ को जीया है, लेकिन 1981 से पहले का वो ‘सिलसिला’ आज भी उनके दिल में सुनहरी याद बनकर धड़कता है, इसलिए जब भी बीते दिनों की बात आती है तो रेखा के जज्बात शब्दों के रूप में बाहर निकल आते हैं, जैसा कि कपिल शर्मा के शो में देखने को मिला।

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First published on: Dec 17, 2024 02:07 PM

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About the Author

Abhishek Mehrotra

अभिषेक मेहरोत्रा उन चुनिंदा पत्रकारों में शुमार हैं, जो हमेशा कुछ नया करने और खुद को समय से आगे रखने में प्रयासरत रहते हैं. प्रिंट मीडिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने डिजिटल जर्नलिज्म में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है. बतौर ग्रुप एडिटर डिजिटल News24 से जुड़ने से पहले अभिषेक मेहरोत्रा बिज़नेस वर्ल्ड में डिजिटल एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे. उन्होंने Zee मीडिया में डिजिटल एडिटर के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है. उनकी लीडरशिप में ज़ी न्यूज़ की वेबसाइट न केवल लोगों की पसंदीदा वेबसाइट बनी, बल्कि उसने नंबर 1 न्यूज़ वेबसाइट का मुकाम भी हासिल किया. अभिषेक मेहरोत्रा के कार्यकाल में जी न्यूज़ की वेबसाइट ने 100 मिलियन यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. अभिषेक मेहरोत्रा ने अपना करियर आगरा के स्वराज्य टाइम्स से जर्नलिज्म की पढाई के दौरान शुरू किया। उसके बाद अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के जरिए अपनी पत्रकारिता की पारी को आगे बढ़ाया। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में है जो आज के युग के मीडिया यानी वेब जर्नलिज्म के अच्छे जानकार माने जाते हैं। नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के साथ वेब पत्रकारिता शुरू करने वाले अभिषेक का जागरण डॉट कॉम को एक बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम योगदान रहा है। अभिषेक ने काफी पहले ही वेब वर्ल्ड की बारीकियों को समझ लिया था, क्योंकि वह जानते थे कि पत्रकारिता का भविष्य डिजिटल मीडिया में ही निहित है. आज वह अपनी उस समझ, ज्ञान, अनुभव और खबरों को बेहतर ढंग से समझने के कौशल के बल पर पत्रकारिता के स्तंभ को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने 5 सालों तक मीडिया स्ट्रीम से जुड़ी वेबसाइट समाचार4मीडिया डॉट कॉम में संपादकीय प्रभारी का दायित्व भी निभाया है. मीडिया जगत और वहां के बिजनेस मॉडल पर उनकी पैनी नजर के चलते वे मीडिया विश्लेषक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खबरों की दुनिया के तमात दबाव और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के व्यंगकार को जीवित रखा है. उनके लेख अमर उजाला, आउटलुक हिंदी, चौथी दुनिया में बतौर व्यंग्यकार निरंतर प्रकाशित होते है. राज्यसभा डॉट कॉम और दैनिक जागरण के लिए वे विदेशी और समसमायिक मुद्दों पर लिखने वाले स्थापित कॉलमिनिस्ट हैं।

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