भारत में मंदिरों से जुड़ी अलग-अलग परंपराएं मौजूद हैं. कहीं पूजा का खास विधान है तो कहीं त्योहारों पर अलग नियम अपनाए जाते हैं. कुछ मंदिरों में धार्मिक मान्यताएं बहुत ही अलग हैं. इसलिए भारत में कुछ मंदिर ऐसे हैं जहां पर पुरुषों की एंट्री बंद है या कुछ समय के लिए बंद कर दी जाती है. कुछ मंदिरों में यह नियम केवल कुछ घंटों या खास दिनों के लिए होता है, जबकि कुछ जगहों पर पुरुषों की एंट्री को लेकर खास नियम हैं. खास बात यह है कि इन परंपराओं के पीछे कहीं देवी की पूजा से जुड़ी मान्यता है तो कहीं सदियों पुरानी धार्मिक कथा है. अगर आपको इसकी जानकारी नहीं है तो आइए जानते हैं भारत के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में जहां पुरुषों को कुछ खास मौकों पर प्रवेश नहीं मिलता है. 

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अट्टुकल भगवती मंदिर, केरल

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित अट्टुकल भगवती मंदिर महिलाओं की बड़ी धार्मिक भागीदारी के लिए जाना जाता है. यहां होने वाला अट्टुकल पोंगाला उत्सव खासतौर पर महिलाओं के लिए आयोजन होते हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर में पूजा और पोंगाला में शामिल होती हैं. उत्सव के दिन मंदिर परिसर में पुरुषों की एंट्री बंद रहती है.

चक्कुलाथुकावु भगवती मंदिर, केरल

केरल का चक्कुलाथुकावु मंदिर देवी भगवती के लिए बनाया गया है. यहां हर साल नारी पूजा की जाती है. इस पूजा के दौरान पुरुषों को मंदिर में एंट्री नहीं मिलती है. इस रस्म में महिला श्रद्धालुओं का खास महत्व होता है और मंदिर के पुरुष पुजारी महिलाओं के पैर धोकर उनका सम्मान करते हैं. यह परंपरा महिलाओं के प्रति सम्मान और देवी शक्ति की आराधना से जुड़ी मानी जाती है. 

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कामाख्या मंदिर, असम

गुवाहाटी में मौजूद कामाख्या मंदिर देश के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है. यहां देवी कामाख्या की पूजा होती है और मंदिर की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक अंबुबाची मेला है. अंबुबाची के दौरान कहा जाता है कि देवी कामाख्या अपने मासिक धर्म के दौर से गुजरती हैं. इस दौरान मंदिर के द्वार बंद रहते हैं और पुरुषों की एंट्री बंद रहती है. इसलिए इस वक्त कोई पुरुष एंट्री नहीं लेता है.  

कन्याकुमारी भगवती अम्मन मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में मौजूद भगवती अम्मन मंदिर देवी कुमारी को समर्पित है. इस मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की वजह से पुरुषों के प्रवेश को लेकर खास नियम हैं. परंपरा के हिसाब से शादीशुदा पुरुषों को मंदिर परिसर में एंट्री नहीं मिलती है, जबकि संन्यासी पुरुष मंदिर के द्वार तक जा सकते हैं. इस परंपरा को देवी के तप और उनके कुमारी रूप से जोड़कर देखा जाता है. 

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ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

राजस्थान के पुष्कर स्थित जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में नियम थोड़ा अलग है. यहां सभी पुरुषों पर रोक नहीं है, बल्कि शादीशुदा पुरुषों के मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर प्रतिबंध बताया जाता है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है. मान्यता के अनुसार, यज्ञ के दौरान देवी सरस्वती के देर से पहुंचने पर ब्रह्मा ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया.

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