क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन पर सुनीता विलियम्स अपने साथियों के साथ 8 दिन के लिए गई थीं, लेकिन 9 महीने बाद उनकी वापसी हुई है। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि उनकी मेंटल हेल्थ पर कितना असर पड़ा है। जीरो ग्रेविटी से वो धरती पर आई हैं और बहुत सारे चैलेंज भी फेस कर चुकी हैं। इसी को लेकर न्यूज 24 के साथ हेल्थ एक्सपर्ट जुड़े और उनकी हेल्थ को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सुनीता विलियम्स की सफल लैंडिंग के बाद किस तरह से उनके मेंटल हेल्थ पर असर पड़ने की संभावना हो सकती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
न्यूज 24 को डॉक्टर जसवंत पाटिल बताते हैं कि स्पेस टेक्नोलॉजी आज इतनी अच्छी हो गई है कि सभी जानकारियां साइंस को मिली हैं और एस्ट्रोनॉमी में बहुत सारे हेल्थ से जुड़े रिसर्च भी हो रहे हैं। एंटी एजिंग में सबसे पहले चैलेंज आता है जीरो ग्रेविटी का और इस तरह इंसान का रह पाना और अपनी बॉडी को कैसे संभाल के रखना है ये भी एक मुश्किल काम होता है। इस दौरान बोन लॉस होता है और मिनरल डेंसिटी कम हो जाती है। इसके साथ में मसल्स में प्रॉब्लम्स आती हैं। एट्रोसिटी को यूज नहीं करें तो मसल्स एट्रोसिटी थोड़ी कम हो जाती है। एकदम लाइट वेट में शरीर के फंक्शन करने पर कई सारे बदलाव आते हैं।
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https://youtu.be/6GmeXWC-4Os?si=z5Fz0u7vcfyOFC7q
इसीलिए बोन डेंसिटी और मसल्स में समस्या होती है, जो धरती पर लौटने के बाद हमें फील होता है। उन्होंने बताया कि वहां से आने के बाद एक पेंसिल भी उनके हाथ में रख दें तो उनको लगता है कि यह बहुत हैवी है। एडजस्टमेंट और अडॉप्टेशन के लिए उनको एक टाइम दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनके मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है। धरती पर आने के बाद उन्हें कुछ चीजों को समझने में समय लग सकता है।
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क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन पर सुनीता विलियम्स अपने साथियों के साथ 8 दिन के लिए गई थीं, लेकिन 9 महीने बाद उनकी वापसी हुई है। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि उनकी मेंटल हेल्थ पर कितना असर पड़ा है। जीरो ग्रेविटी से वो धरती पर आई हैं और बहुत सारे चैलेंज भी फेस कर चुकी हैं। इसी को लेकर न्यूज 24 के साथ हेल्थ एक्सपर्ट जुड़े और उनकी हेल्थ को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सुनीता विलियम्स की सफल लैंडिंग के बाद किस तरह से उनके मेंटल हेल्थ पर असर पड़ने की संभावना हो सकती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
न्यूज 24 को डॉक्टर जसवंत पाटिल बताते हैं कि स्पेस टेक्नोलॉजी आज इतनी अच्छी हो गई है कि सभी जानकारियां साइंस को मिली हैं और एस्ट्रोनॉमी में बहुत सारे हेल्थ से जुड़े रिसर्च भी हो रहे हैं। एंटी एजिंग में सबसे पहले चैलेंज आता है जीरो ग्रेविटी का और इस तरह इंसान का रह पाना और अपनी बॉडी को कैसे संभाल के रखना है ये भी एक मुश्किल काम होता है। इस दौरान बोन लॉस होता है और मिनरल डेंसिटी कम हो जाती है। इसके साथ में मसल्स में प्रॉब्लम्स आती हैं। एट्रोसिटी को यूज नहीं करें तो मसल्स एट्रोसिटी थोड़ी कम हो जाती है। एकदम लाइट वेट में शरीर के फंक्शन करने पर कई सारे बदलाव आते हैं।
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इसीलिए बोन डेंसिटी और मसल्स में समस्या होती है, जो धरती पर लौटने के बाद हमें फील होता है। उन्होंने बताया कि वहां से आने के बाद एक पेंसिल भी उनके हाथ में रख दें तो उनको लगता है कि यह बहुत हैवी है। एडजस्टमेंट और अडॉप्टेशन के लिए उनको एक टाइम दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनके मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है। धरती पर आने के बाद उन्हें कुछ चीजों को समझने में समय लग सकता है।
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