स्टील की बोतल से पानी पीना कितना सुरक्षित है? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे अपनी सेहत से खिलवाड़

Steel Water Bottle: सोशल मीडिया पर अक्सर ही इस तरह के दावे किए जाते हैं कि स्टील की बोतल से पानी पीना जहर से कम नहीं है क्योंकि इसमें केमिकल्स पानी में घुलकर शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में यहां जानिए स्टील की बोतल से पानी पीना चाहिए या नहीं.

Steel Bottle

स्टील की बोतल से पानी पीना चाहिए या नहीं, जानिए यहां. Image Credits - Pexels

Steel Bottle: पानी किस तरह की बोतल में पिया जा रहा है यह बहुत मायने रखता है. अगर पानी साफ है लेकिन बोतल सही मटीरियल से नहीं बनी होगी तो सेहत को नुकसान हो सकता है. ऐसे में प्लास्टिक की बोतल के लिए तो अक्सर ही कहा जाता है कि प्लास्टिक की बोतल से पानी नहीं पीना चाहिए, लेकिन क्या स्टील की बोतल (Steel Water Bottle) से पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है? सोशल मीडिया पर अक्सर ही ऐसे दावे किए जाते हैं कि स्टील की बोतल से पानी पीने पर इसमें मौजूद क्रोमियम जैसे केमिकल्स पानी में फैल जाते हैं और सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. लेकिन, इसमें कितनी सच्चाई है और स्टील की बोतल से पानी पीना कितना सुरक्षित है, आइए जानते हैं.

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क्या स्टील की बोतल से पानी पीना चाहिए

खाना पकाने के लिए या बोतल बनाने के लिए जिस स्टील का इस्तेमाल किया जाता है वो फूड-ग्रेड स्टील होता है. फूड ग्रेड स्टील कोरोजन और केमिकल्स के रिसाव को रोकने के लिए स्पेशली फॉर्मुलेट किया जाता है. 304 और 316 ग्रेड्स का खासतौर से इस्तेमाल होता है जोकि एसिडिक फूड्स के साथ रिएक्ट नहीं करता है और केमिकल्स के रिसाव को रोकता है. 304 इंडस्ट्री स्टैंडर्ड है और 316 हाई सॉल्ट और एसिडिक एन्वायरमेंट के लिए सबसे बेहतर है.

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अगर आप हाई क्वालिटी स्टेनलेस स्टील (High Quality Stainless Steel) की बोतल का इस्तेमाल करते हैं तो यह पानी में केमिकल्स नहीं छोड़ता है और इस बोतल से पानी पिया जा सकता है. अगर इसमें कुछ एसिडिक लिक्विड जैसे नींबू पानी वगैरह डालकर पी रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि एसिडिक लिक्विड्स को स्टील की बोतल में बहुत ज्यादा लंबे समय तक डालकर ना छोड़ें.

खराब क्वालिटी के स्टील का कैसे पता चलता है

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  • अगर आपको पानी पीते हुए मेटेलिक सा टेस्ट (Metallic Taste In Steel) आता है तो यह खराब क्वालिटी के स्टेनलेस स्टील या खराब इनर फिनिशिंग के कारण हो सकता है.
  • खराब क्वालिटी की स्टील की बोतल से केमिकल जैसी बदबू आएगी. अगर इसमें कोई ड्रिंक रखी जाएगी तो अगले दिन भी बोतल में उस ड्रिंक की बदबू बनी रहेगी.
  • खराब स्टील पर जल्दी जंग लग जाता है. इस बोतल की लेयर हटती हुई सी नजर आती है.
  • बोतल का रंग कुछ ही हफ्तों में फीका पड़ने लगता है.
  • अगर बोतल चुंबक की तरफ खिंचती है तो इसका मतलब यह हो सकता है कि स्टील क्वालिटी खराब है और सस्ते मटीरियल से बोतल को तैयार किया गया है.
  • सस्ते मटीरियल से बनी बोतल हल्की होती है और इसकी बनावट टिकाऊ नहीं लगती है.
  • खराब क्वालिटी की स्टील (Low Quality Steel) की बोतल का ढक्कन भी खराब क्वालिटी का ही होता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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