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बच्चों के लिए कभी नहीं खरीदनी चाहिए ये 5 चीजें, पीडियाट्रिशियन Dr. Nimish Kulkarni ने कहा ना करें यह गलती

Parenting Tips: पैरेंट्स अक्सर ही बच्चों के लिए बाजार में मिलने वाली कोई भी चीज उठा लाते हैं. लेकिन, पीडियाट्रिशियन डॉ. निमिश कुलकर्णी का कहना है कि पैरेंट्स को बच्चों के लिए ये चीजें कभी नहीं खरीदनी चाहिए.

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बच्चों के लिए कौन सी चीजें सही नहीं हैं बता रहे हैं डॉक्टर. Image Credits - Pexels

Parenting Tips: बच्चे के लिए तरह-तरह की चीजें खरीदना पैरेंट्स को बेहद अच्छा लगता है. लेकिन, अक्सर ही वे बाजार से ऐसे टूल्स या चीजें खरीद लाते हैं जो बच्चे की सेहत (Child’s Health) के लिए अच्छे नहीं है. इन चीजों से बच्चे की शारीरिक और मानसिक डेवलपमेंट धीमी पड़ सकती है और ये चीजें उसे कई तरह से हानि पहुंचाती हैं सो अलग. ऐसे में बच्चों के डॉक्टर पीडियाट्रिशियन डॉ. निमिश कुलकर्णी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि वो कौन सी चीजें हैं जो पैरेंट्स को अपने बच्चे के लिए कभी नहीं खरीदनी चाहिए.

बच्चों के लिए कौन सी चीजें कभी नहीं खरीदनी चाहिए

बेबी वॉकर्स

डॉक्टर ने बताया कि बच्चों के लिए बेबी वॉकर्स (Baby Walkers) नहीं खरीदने चाहिए. ये बच्चों की चलने की क्षमता को कम करते हैं या कहें इनकी वजह से बच्चे जल्दी नहीं चल पाते हैं. बेबी वॉकर्स से बच्चों के पैरों की मसल्स की डेवलपमेंट धीमी पड़ती है. इन बेबी वॉकर्स से बच्चे किसी दुर्घटना का भी शिकार हो सकते हैं जैसे अगर ध्यान ना दिया जाए तो बच्चे सीढ़ियों से गिर सकते हैं. बेबी वॉकर्स हटाने के बाद भी बच्चे पंजों के बल ही चलते हैं. इसीलिए कई देशों में बेबी वॉकर्स को बैन भी कर दिया गया है.

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फ्रूट निबलर्स

फ्रूट निबलर्स पेसिफायर के शेप के होते हैं. इनमें बच्चे को फल भरकर दिया जाता है जिससे इस सिलिकोन के ऊपर से बच्चे उस फल का रस चूसकर खाते हैं. लेकिन, डॉक्टर का कहना है कि फ्रूट निबलर्स के कारण बच्चा फलों के टेक्सचर और असल स्वाद को पहचान ही नहीं सकेगा. इन निबलर्स की वजह से बच्चे के चबाने की क्षमता धीमी पड़ेगी, ओरल मोटर डेवलपमेंट धीमी होगी और अगर इन्हें सही तरह से साफ ना किया जाए तो इनमें बैक्टीरिया पनपने लगेंगे जिससे इंफेक्शंस बढ़ेंगे.

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वाइट नॉइज मशीन

डॉक्टर ने बताया कि इन वाइट नॉइज मशीन का लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो इनसे ये बच्चे में सुनने की क्षमता को कम कर सकते हैं. इनकी आवाज तेज होती है जो कानों को नुकसान पहुंचाती है. बच्चे को असल में इस मशीन की जरूरत ही नहीं होती है.

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हेड शेपिंग तकिया

बच्चे के सिर के आकार को सामान्य करने के लिए ये तकिए बेचे जाते हैं. डॉक्टर का कहना है कि बच्चों का ब्रेन हमेशा बढ़ता रहता है. ऐसे में जैसे-जैसे ब्रेन बढ़ता है वैसे-वैसे सिर का आकार भी चेंज होता है. इसीलिए बच्चे को किसी तरह के हेड शेपिंग पिलो (Head Shaping Pillow) की जरूरत नहीं होती है. इनसे बच्चों में दम घुटने का खतरा रहता है. बच्चों को अगर तकिया लगाना ही हो तो सिंपल सा फ्लैट तकिया लगाएं.

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बेबी फुटवियर

बाजार में बच्चों के लिए अलग-अलग तरह के कलरफुल फुटवियर मिलते है. डॉक्टर बताते हैं कि ये फुटवियर क्यूट तो लगते हैं लेकिन बच्चे के लिए हानिकारक होते हैं. इसीलिए बच्चे को या तो नंगे पांव रखें या फिर जुराब पहनाकर रखें. जबतक बच्चा थोड़ा बड़ा ना हो जाए तबतक उसे सख्त फुटवियर नहीं पहनाने चाहिए.

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यह भी पढ़ें – छोटे बच्चे को कार्टून नहीं बल्कि फोन पर दिखाएं यह चीज, साइकोलॉजिस्ट ने कहा बढ़ेगी सोशल लर्निंग

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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