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हफ्ते में सिर्फ 4 दिन खुलेंगे दफ्तर और स्कूल, ईरान जंग के बीच श्रीलंका सरकार का बड़ा फैसला

श्रीलंका में गहराया ऊर्जा संकट! ईंधन बचाने के लिए सरकार ने लागू किया 4-डे वर्किंग वीक. अब बुधवार को बंद रहेंगे स्कूल और दफ्तर. जानें क्यूआर कोड आधारित फ्यूल राशनिंग के नए नियम.

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गहराते ऊर्जा संकट ने दक्षिण एशियाई देशों की कमर तोड़ दी है. पाकिस्तान के बाद अब श्रीलंका ने भी ईंधन की भारी किल्लत के सामने घुटने टेक दिए हैं. देश में तेल की बूंद-बूंद बचाने के लिए सरकार ने एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. श्रीलंका सरकार ने सोमवार, 16 मार्च को देश में ‘फोर-डे वर्किंग वीक’ लागू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. अब सरकारी संस्थानों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सप्ताह में केवल चार दिन ही काम होगा. ईंधन संरक्षण के लिए अब हर बुधवार को सरकारी दफ्तर और शिक्षण संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे.

कोलंबो में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जरूरी सेवाओं के कमिश्नर जनरल ने साफ किया कि परिवहन में इस्तेमाल होने वाले तेल की खपत कम करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है.

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प्राइवेट सेक्टर को सलाह और जरूरी सेवाओं को छूट

सरकार ने केवल सरकारी क्षेत्र तक ही सीमित न रहकर निजी कंपनियों से भी अपील की है कि वे ऊर्जा बचाने के लिए अपने वर्किंग डेज कम करने या वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर विचार करें. हालांकि, देश की व्यवस्था न ठप हो, इसके लिए कुछ विभागों जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, बंदरगाह, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क को इस कटौती से बाहर रखा गया है

QR कोड से मिलेगा पेट्रोल-डीजल

सिर्फ छुट्टियां बढ़ाना ही काफी नहीं था, इसलिए श्रीलंका ने ईंधन के वितरण पर भी कड़ा पहरा लगा दिया है. अब देश में डिजिटल राशनिंग प्रणाली लागू की गई है. दोपहिया, तिपहिया या कार आदि वाहनों के आधार पर साप्ताहिक कोटा तय कर दिया गया है. उपभोक्ताओं को फ्यूल स्टेशनों पर QR कोड दिखाना होगा. इससे न केवल कालाबाजारी रुकेगी, बल्कि सीमित स्टॉक का समान वितरण भी सुनिश्चित हो सकेगा.

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क्यों आए ऐसे हालात?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. श्रीलंका, जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, के पास सीमित ईंधन भंडार बचा है. सरकार को उम्मीद है कि कार्य सप्ताह में कटौती करने से करोड़ों लीटर ईंधन की बचत होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ठप होने से बचाया जा सकेगा.

First published on: Mar 17, 2026 09:01 AM

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About the Author

Vijay Kumar

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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