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Bhai Dooj 2025: 22 या 23 अक्टूबर, कब मनाया जाएगा भाई दूज? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और तिलक लगाने की विधि

Bhai Dooj 2025: भाई दूज 2025 की सही तारीख को लेकर इस बार काफी भ्रम की स्थिति है कि क्या ये दिवाली के दो दिन बाद मनाई जाएगी या किसी अन्य दिन? आखिर इस साल तिलक का शुभ मुहूर्त क्या है? आइए जानते हैं, भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व कब और कैसे मनाएं और इसका पौराणिक महत्व क्या है?

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Written By: News24 हिंदी Updated: Oct 21, 2025 15:31
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Bhai Dooj 2025: हिन्दू धर्म में भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व है. रक्षाबंधन की तरह यह दिन भी बहनों के लिए खास होता है, क्योंकि इस दिन वे अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. यह प्रायः दिवाली के 2 दिन बाद यानी कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है लेकिन इस साल इसके डेट को लेकर काफी कन्फ्यूजन है. आइए जानते हैं, भाई दूज 2025 की सही तारीख, तिलक का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक महत्व क्या है?

भाई दूज 2025 कब है?

द्रिक पंचांग पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी. इसलिए इस साल भाई दूज का पर्व गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा.

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ये है तिलक का बेस्ट मुहूर्त

भाई दूज पर बहनें स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं और भाई को बुलाकर तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और मिठाई खिलाती हैं. बदले में भाई उन्हें उपहार देकर स्नेह और सुरक्षा का वचन देता है. आइए जानते हैं, इस दिन तिलक लगाने का बेस्ट मुहूर्त क्या है?

ये भी पढ़ें: Bhai Dooj 2025: जब भाई नहीं हो पास तो कैसे मनाएं ‘भाई दूज’, अपनाएं ये उपाय; होगी अकाल मृत्यु से रक्षा

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तिलक लगाने का बेस्ट मुहूर्त: दोपहर 1:13 PM से 3:28 PM बजे तक यानी बहनों को अपने भाई को तिलक करने के लिए लगभग 2 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा.

भाई दूज की पूजा विधि

भाई दूज के दिन पूजा करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें:

  • भाई और बहन दोनों ही प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें.
  • इसके बाद यमराज और यमुनाजी की पूजा करें.
  • भाई को तिलक लगाने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर बिठाएं.
  • उसके माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करें, फिर मिठाई खिलाएं और आरती करें.
  • भाई के हाथ में कलावा बांधें और दीपक जलाकर उसकी आरती करें.
  • अंत में भाई बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और उपहार दें.

भाई दूज का पौराणिक महत्व

भाई दूज की परंपरा यमराज और यमुना की कथा से जुड़ी है. मान्यता है कि यमराज एक बार अपनी बहन यमुना के आग्रह पर उनके घर गए. यमुना ने उनका सत्कार कर तिलक लगाया और भोजन कराया. इस पर यमराज ने वचन दिया कि जो भी बहन इस दिन अपने भाई को प्रेमपूर्वक तिलक करेगी, उसके भाई को दीर्घायु प्राप्त होगी और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा. तभी से यह परंपरा हर साल दीपावली के दूसरे दिन निभाई जाती है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Oct 21, 2025 03:31 PM

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