अक्सर अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से जुड़ी खबरों में ‘स्टेपल्ड वीजा’ शब्द सुनने को मिलता है, लेकिन बहुत से लोगों को इसका पूरा मतलब और कूटनीतिक महत्व समझ में नहीं आता. यह कोई साधारण वीजा नहीं बल्कि एक ऐसा दस्तावेज है जो देशों के बीच राजनीतिक और सीमाई मतभेदों का संकेत देता है. वीजा सामान्य रूप से किसी देश में प्रवेश करने या वहां ठहरने की आधिकारिक अनुमति होती है, जो सीधे पासपोर्ट के पन्नों पर मुहर या स्टिकर के रूप में लगाई जाती है. लेकिन स्टेपल्ड वीजा इससे अलग है क्योंकि यह पासपोर्ट में स्थायी रूप से दर्ज नहीं किया जाता.
क्या होता है स्टेपल्ड वीजा
स्टेपल्ड वीजा एक अलग कागज़ पर जारी किया जाता है जिसे पासपोर्ट पर स्टैम्प करने की जगह उससे स्टेपल या पिन कर दिया जाता है. इसे किसी भी समय आसानी से हटाया जा सकता है, इसलिए यह पासपोर्ट पर यात्रा का स्थायी रिकॉर्ड नहीं छोड़ता. यह उसी स्थिति में दिया जाता है जब जारी करने वाला देश किसी दूसरे देश के अधिकार क्षेत्र या संप्रभुता को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहता.
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क्यों जारी करते हैं कुछ देश?
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्टेपल्ड वीज़ा अक्सर राजनीतिक संकेत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. जब दो देशों के बीच किसी क्षेत्र को लेकर विवाद हो, तो एक पक्ष यह दिखाने के लिए ऐसा करता है कि वह उस भूमि को दूसरे देश का हिस्सा नहीं मानता. यह अपने आप में एक ‘डिप्लोमैटिक पॉलिसी स्टेटमेंट’ होता है.
भारत में क्यों नहीं है मान्य?
भारत सरकार ने कई बार यह साफ किया है कि स्टेपल्ड वीजा को वह वैध यात्रा दस्तावेज नहीं मानता. अगर किसी यात्री के पास ऐसा वीजा पाया जाता है, तो भारत उसे मान्यता नहीं देता और संबंधित यात्रियों को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाती. अतीत में कई बार ऐसा हुआ है जब अरुणाचल या जम्मू-कश्मीर से चीन जाने वाले भारतीय नागरिकों को एयरपोर्ट पर बोर्डिंग से रोक दिया गया, क्योंकि उनके पासपोर्ट पर आधिकारिक वीजा स्टैम्प नहीं था, बल्कि स्टेपल्ड पेपर लगा हुआ था.
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