क्या है कोतवाली-सदर-मुफस्सिल? कई शहरों में देखा होगा इस नाम से पुलिस थाना, जानिए असली वजह

‘कोतवाली’, ‘सदर’ या ‘मुफस्सिल’ नाम रखने का एक खास कारण है. ये नाम ब्रिटिश काल से पहले की मुगल और फारसी प्रभाव वाली पुलिस व्यवस्था की देन हैं, जो आज भी कई जगहों पर ज्यों के त्यों बरकरार है.

Kotwali-Sadar-Mufassil

भारत के ज्यादातर पुराने शहरों और कस्बों में पुलिस थानों के बोर्ड पर ‘कोतवाली’, ‘सदर’ या ‘मुफस्सिल’ जैसे नाम अक्सर नजर आते हैं. ये नाम सुनकर लगता है कि ये किसी खास इलाके या पुरानी परंपरा से जुड़े होंगे. अगर आप भी इन नामों से शहर या पुलिस थाना देखते हैं तो जरूर आपको मन में भी ऐसा ही सवाल आता होगा. हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है, क्योंकि ‘कोतवाली’, ‘सदर’ या ‘मुफस्सिल’ नाम रखने का एक खास कारण है. ये नाम ब्रिटिश काल से पहले की मुगल और फारसी प्रभाव वाली पुलिस व्यवस्था की देन हैं, जो आज भी कई जगहों पर ज्यों के त्यों बरकरार है.

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कहां से आया ‘कोतवाल’?


‘कोतवाली’ शब्द ‘कोतवाल’ से निकला है, जो मुगल काल में शहर का प्रमुख सुरक्षा अधिकारी होता था. कोतवाल शहर की सुरक्षा, बाजारों की निगरानी, रात की गश्त और कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभालता था. इसलिए शहर के सबसे पुराने, व्यस्त और मुख्य इलाके में स्थित थाने को ‘कोतवाली थाना’ कहा जाता है. जैसे दिल्ली, लखनऊ, पटना और जयपुर जैसे शहरों में कोतवाली थाना अक्सर सदर बाजार या पुराने शहर के केंद्र में मिलता है, जहां भीड़भाड़, व्यापार और ऐतिहासिक महत्व ज्यादा होता है. कई जगहों पर यह थाना सबसे पुराना और प्रतिष्ठित माना जाता है.

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‘सदर’ का क्या होता है मतलब?


‘सदर’ का मतलब होता है मुख्य या केंद्रीय. सदर थाना आमतौर पर जिले के मुख्यालय क्षेत्र में स्थित प्रमुख थाना होता है. यह ज्यादातर उन इलाकों को कवर करता है जहां जिला कलेक्ट्रेट, कोर्ट, सरकारी दफ्तर और प्रशासनिक अधिकारी रहते हैं. सदर थाना जिले की प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु माना जाता है और कई बार यह कोतवाली से अलग या उसके साथ मिलाकर काम करता है. बड़े जिलों में सदर थाना शहर के दिल में होता है, जहां सरकारी कामकाज ज्यादा चलता है.

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‘मुफस्सिल’ का क्या है मतलब?


‘मुफस्सिल’ एक फारसी शब्द है, जिसका अर्थ है शहर से बाहर का इलाका या ग्रामीण क्षेत्र. मुफस्सिल थाना शहर की सीमा से बाहर के कस्बों, गांवों या टीयर-2 इलाकों की कानून-व्यवस्था संभालता है. पुरानी व्यवस्था में शहर के बाहरी हिस्सों को अलग से देखने के लिए ऐसे थाने बनाए जाते थे. जैसे पटना में मुफस्सिल थाना शहर से सटे ग्रामीण इलाकों को कवर करता है. बड़े जिलों में अक्सर एक सदर या शहर थाना और एक मुफस्सिल थाना अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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