World Radio Day: दुन‍िया के पहले रेड‍िया की क्‍या थी कीमत? क‍िस कंपनी ने शुरू क‍िया था कमर्श‍ियल रेड‍ियो बनाना

साल 1970 और 80 के दशक तक भारत में रेडियो रखने के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता था. जैसे आज गाड़ियों का लाइसेंस होता है, वैसे ही पोस्ट ऑफिस जाकर रेडियो का लाइसेंस बनवाना और सालाना फीस देनी होती थी. बिना लाइसेंस रेडियो पकड़े जाने पर जुर्माना लगता था!

World Radio Day

जानें दुन‍िया के पहले रेड‍ियो की कीमत क्‍या थी

Radio Day 2026: रेडियो का इतिहास वास्तव में बहुत दिलचस्प है. यह किसी एक व्यक्ति के आविष्कार से ज्यादा कई महान दिमागों की मेहनत का नतीजा था. लेकिन जब हम दुनिया के पहले रेडियो की बात करते हैं, तो गुग्लिएल्मो मार्कोनी (Guglielmo Marconi) का नाम सबसे ऊपर आता है. दुनिया के पहले सफल वायरलेस टेलीग्राफ (रेडियो का शुरुआती रूप) का श्रेय इटली के आविष्कारक गुग्लिएल्मो मार्कोनी को ही द‍िया जाता है.

विज्ञापन

साल 1895 में मार्कोनी ने पहली बार रेडियो तरंगों के जरिए सिग्नल भेजने में सफलता हासिल की थी. हालांकि, मार्कोनी से पहले निकोला टेस्ला, हेनरिक हर्ट्ज और भारत के महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने भी रेडियो तरंगों पर महत्वपूर्ण शोध किए थे, लेकिन मार्कोनी ने इसे एक व्यावहारिक संचार उपकरण (Communication Device) के रूप में विकसित किया.

विज्ञापन

वह पहली कंपनी, जिसने कमर्शियल रेडियो बनाना शुरू किया

व्यावसायिक तौर पर रेडियो बनाने की शुरुआत खुद मार्कोनी ने ही की थी. उनकी कंपनी का नाम था द मार्कोनी वायरलेस टेलीग्राफ एंड सिग्नल कंपनी (The Marconi Wireless Telegraph & Signal Company), जिसे 1897 में ब्रिटेन में स्थापित किया गया था.

विज्ञापन

बाद में, वेस्टिंगहाउस (Westinghouse) वह पहली बड़ी कंपनी बनी जिसने 1920 के दशक में बड़े पैमाने पर आम जनता के लिए घरेलू रेडियो सेट बनाना शुरू किया.

विज्ञापन

पहले रेडियो की कीमत क्या थी?
1920 के दशक में जब रेडियो आम जनता के लिए उपलब्ध हुए, तो वे बहुत महंगे थे और हर कोई उन्हें नहीं खरीद सकता था. शुरुआती कमर्शियल रेडियो सेट जैसे वेस्टिंगहाउस का RA-DA मॉडल की कीमत लगभग $50 से $200 के बीच थी. अगर उस समय के $200 को आज (2026) की मुद्रास्फीति (Inflation) के हिसाब से देखें, तो यह लगभग $3,000 से $3,500 यानी करीब 2.5 लाख से 3 लाख रुपये के बराबर होगा. उस समय रेडियो एक लक्जरी आइटम माना जाता था, जो केवल अमीर घरों की शोभा बढ़ाता था.

बता दें क‍ि अमेरिका का KDKA (पिट्सबर्ग) दुनिया का पहला कमर्शियल रेडियो स्टेशन था जिसने 1920 में प्रसारण शुरू किया.

विज्ञापन

भारत में रेडियो की शुरुआत और पहली कंपनियां
भारत में रेडियो का इतिहास काफी दिलचस्प है. जब पूरी दुनिया में रेडियो एक क्रांति बन रहा था, तब भारत में भी इसकी शुरुआत बहुत ही शाही अंदाज में हुई. भारत में कमर्शियल रेडियो के आने से पहले साल 1923 में रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे ने पहला प्रसारण किया था. लेकिन जब बात रेडियो सेट बेचने की आई, तो फिलिप्स (Philips) और मर्फी (Murphy) जैसी विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजार पर कब्जा जमाया.

मर्फी रेडियो (Murphy Radio) भारत में सबसे लोकप्रिय ब्रांड बना. आपको याद होगा, उस जमाने के विज्ञापनों में मर्फी बेबी बहुत मशहूर था. फिलिप्स (Philips) ने सन 1930 के दशक में भारत में रेडियो सेट आयात करने और बाद में यहीं असेंबल करने की शुरुआत की.

विज्ञापन

पुराने जमाने के वॉल्व रेडियो (Valve Radios) कैसे थे?
आज के डिजिटल और चिप वाले रेडियो के विपरीत, पुराने रेडियो वॉल्व (Vacuum Tubes) पर चलते थे. जैसे ही आप रेडियो ऑन करते थे, वह तुरंत नहीं बजता था. उसके अंदर लगे कांच के वॉल्व धीरे-धीरे गर्म होकर नारंगी (Orange) जलने लगते थे, तब जाकर आवाज आती थी.

ये आज के पोर्टेबल रेडियो जैसे नहीं थे. ये लकड़ी के बने भारी-भरकम कैबिनेट जैसे होते थे, जो घर में किसी कीमती फर्नीचर की तरह सजाकर रखे जाते थे. वॉल्व रेडियो की आवाज बहुत ही वॉर्म और भारी होती थी, जो पुराने संगीत प्रेमियों को आज भी बहुत पसंद आती है.

विज्ञापन

भारत का अपना ‘आकाशवाणी’ (AIR)
1930 में सरकार ने इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की शुरुआत की, जिसे 1936 में बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) कर दिया गया. 1957 में इसका नाम आकाशवाणी रखा गया.

एक मजेदार बात यह भी है क‍ि साल 1970 और 80 के दशक तक भारत में रेडियो रखने के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता था. जैसे आज गाड़ियों का लाइसेंस होता है, वैसे ही पोस्ट ऑफिस जाकर रेडियो का लाइसेंस बनवाना और सालाना फीस देनी होती थी. बिना लाइसेंस रेडियो पकड़े जाने पर जुर्माना लगता था!

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ