लखनऊ अग्निकांड में सब कुछ जलकर हुआ राख, फरिश्ता बनकर यूं की कई परिवारों की मदद
राजधानी लखनऊ के विकासनगर स्थित झुग्गी बस्ती में पिछले दिनों लगी भीषण आग ने न केवल आशियाने जलाए, बल्कि सैकड़ों परिवारों के सपनों को भी राख कर दिया था. जहां कल तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां केवल काला धुआं और मलबे का ढेर बचा था. आपदा की इस घड़ी में जब प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थे, तब राजस्थान के जोधपुर से उम्मीद की एक किरण 'फरिश्ता' बनकर आई.
Edited By : Versha Singh|Updated: Apr 23, 2026 21:26
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राजधानी लखनऊ के विकासनगर स्थित झुग्गी बस्ती में पिछले दिनों लगी भीषण आग ने न केवल आशियाने जलाए, बल्कि सैकड़ों परिवारों के सपनों को भी राख कर दिया था. जहां कल तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां केवल काला धुआं और मलबे का ढेर बचा था. आपदा की इस घड़ी में जब प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थे, तब राजस्थान के जोधपुर से उम्मीद की एक किरण 'फरिश्ता' बनकर आई.
जोधपुर स्थित 'ट्रू होप फाउंडेशन' (True Hope Foundation) और इसके सह-संस्थापक धवल दर्जी ने लखनऊ पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभाली. उनके द्वारा किए गए प्रयासों ने न केवल पीड़ितों को छत दी, बल्कि मानवता की एक मिसाल भी पेश की है.
आमतौर पर ऐसी आपदाओं के बाद प्रशासन या संस्थाओं द्वारा तिरपाल या प्लास्टिक की पन्नियां बांट दी जाती हैं, जो गर्मियों में किसी भट्टी से कम नहीं होतीं. लेकिन धवल दर्जी और उनकी टीम ने तत्काल प्रभाव से *100 हीट-रेसिस्टेंट (ताप-रोधी) और वॉटरप्रूफ शेल्टर स्थापित किए.
बस्ती की एक बुजुर्ग महिला, जिनका सब कुछ जल गया था, नम आंखों से कहती हैं, 'बेटा, आग ने तो हमें सड़क पर ला दिया था, लेकिन इन बच्चों (फाउंडेशन की टीम) ने हमें फिर से इज्जत की छत दे दी. भगवान इन्हें बहुत तरक्की दे.'
जोधपुर के रहने वाले धवल दर्जी को हाल ही में 'डिजास्टर मैनेजमेंट हीरो अवार्ड' से सम्मानित किया गया है.
True hope foundation ने अपनी तकनीक और जज्बे से उन लोगों के जख्मों पर मरहम लगाया है जो सब कुछ खो चुके थे.
राजधानी लखनऊ के विकासनगर स्थित झुग्गी बस्ती में पिछले दिनों लगी भीषण आग ने न केवल आशियाने जलाए, बल्कि सैकड़ों परिवारों के सपनों को भी राख कर दिया था. जहां कल तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां केवल काला धुआं और मलबे का ढेर बचा था. आपदा की इस घड़ी में जब प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थे, तब राजस्थान के जोधपुर से उम्मीद की एक किरण ‘फरिश्ता’ बनकर आई.
जोधपुर स्थित ‘ट्रू होप फाउंडेशन’ (True Hope Foundation) और इसके सह-संस्थापक धवल दर्जी ने लखनऊ पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभाली. उनके द्वारा किए गए प्रयासों ने न केवल पीड़ितों को छत दी, बल्कि मानवता की एक मिसाल भी पेश की है.
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आमतौर पर ऐसी आपदाओं के बाद प्रशासन या संस्थाओं द्वारा तिरपाल या प्लास्टिक की पन्नियां बांट दी जाती हैं, जो गर्मियों में किसी भट्टी से कम नहीं होतीं. लेकिन धवल दर्जी और उनकी टीम ने तत्काल प्रभाव से *100 हीट-रेसिस्टेंट (ताप-रोधी) और वॉटरप्रूफ शेल्टर स्थापित किए.
बस्ती की एक बुजुर्ग महिला, जिनका सब कुछ जल गया था, नम आंखों से कहती हैं, ‘बेटा, आग ने तो हमें सड़क पर ला दिया था, लेकिन इन बच्चों (फाउंडेशन की टीम) ने हमें फिर से इज्जत की छत दे दी. भगवान इन्हें बहुत तरक्की दे.’
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जोधपुर के रहने वाले धवल दर्जी को हाल ही में ‘डिजास्टर मैनेजमेंट हीरो अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है.
True hope foundation ने अपनी तकनीक और जज्बे से उन लोगों के जख्मों पर मरहम लगाया है जो सब कुछ खो चुके थे.