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देश में अवैध आप्रवास और उससे पैदा हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. भारत सरकार ने ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ के तहत एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो देशभर में हो रहे असामान्य जनसंख्या बदलावों का अध्ययन करेगी और उनसे निपटने के उपाय सुझाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को इस मिशन की घोषणा की थी, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर 2025 को इसे मंजूरी दी थी. अब गृह मंत्रालय ने इस समिति के गठन की औपचारिक घोषणा कर दी है. समिति की अध्यक्षता रिटायर्ड जज प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे. समिति में जनगणना आयुक्त के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा , पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि सदस्य होंगे.

एक साल में रिपोर्ट सौंपनी होगी

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Foreigners-I) समिति के सदस्य सचिव होंगे. समिति को एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. जरूरत पड़ने पर इसका कार्यकाल छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘Unnatural Demographic Change’ देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. उन्होंने कहा कि समिति अवैध आप्रवास, असामान्य बसावट पैटर्न और धार्मिक-सामाजिक समुदायों में हो रहे जनसंख्या बदलावों का गहन अध्ययन करेगी और टाइम पर समाधान सुझाएगी.

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कैसे काम करेगी समिति?

समिति देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध आप्रवास के कारण हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी. इसके साथ ही सीमा पार गतिविधियों, आर्थिक अवसरों और सामाजिक-पर्यावरणीय कारणों का भी विश्लेषण किया जाएगा. समिति का प्रमुख फोकस अवैध आप्रवासियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए कानूनी एवं स्थायी तंत्र विकसित करने पर रहेगा. इसके अलावा सीमा प्रबंधन, पहचान प्रणाली और जनसंख्या स्थिरीकरण को मजबूत बनाने के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करने की भी सिफारिश की जाएगी. सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए अवैध आप्रवास और उससे जुड़े जनसांख्यिकीय असंतुलन से प्रभावी ढंग से निपटने की रणनीति तैयार की जाएगी.

First published on: May 26, 2026 08:20 PM

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