सोनम वांगचुक से क्या था खतरा? सरकार ने SC में बताई हिरासत में लेने की वजह; कल फिर सुनवाई

सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने के पीछे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें दीं? उनके किन बयानों और विदेशी कनेक्शन के दावों को लद्दाख की सुरक्षा के लिए खतरा माना गया? पढ़िये प्रभाकर मिश्रा की रिपोर्ट.

Sonam Wangchuk detention case

लद्दाख के मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. लद्दाख प्रशासन की ओर से पेश हुए एएसजी केएम नटराज ने अदालत को बताया कि वांगचुक के बयानों और हरकतों से देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था. सरकार का दावा है कि वांगचुक ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वे सेना के साथ सहयोग नहीं करेंगे, जो किसी भी भारतीय नागरिक के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता. इसके अलावा उन पर जनमत संग्रह की बात करने और आत्मदाह की धमकी देकर लोगों को हिंसक होने के लिए उकसाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

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सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी?

सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि लद्दाख एक बेहद संवेदनशील सीमावर्ती इलाका है, जिसकी तुलना वांगचुक ने चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से कर दी थी. नटराज ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने सरकार को अपने विदेशी संपर्कों और प्रभाव की चेतावनी दी थी. उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि वे भारत के घरेलू मुद्दों को सुलझाने के लिए अपने विदेशी कनेक्शन का इस्तेमाल करेंगे. प्रशासन के मुताबिक एक संवेदनशील बॉर्डर एरिया में इस तरह की बयानबाजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती थी, जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन था.

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वांगचुक को किन घटनाओं के लिए ठहराया जिम्मेदार?

प्रशासन ने वांगचुक की भूख हड़ताल और बयानों को लद्दाख में हुई हिंसा का मुख्य कारण बताया है. अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार वांगचुक की हरकतों की वजह से हुई हिंसा में 4 लोगों की मौत हुई और करीब 160 लोग घायल हुए. उग्र भीड़ ने कई सरकारी इमारतों में आग तक लगा दी थी. सरकार का कहना है कि अगर समय रहते उन्हें प्रिवेंटिव कस्टडी यानी एहतियातन हिरासत में नहीं लिया जाता, तो हालात और भी ज्यादा बेकाबू हो सकते थे. हिरासत में लेते ही स्थिति पर काबू पा लिया गया, जो साबित करता है कि यह कदम शांति के लिए जरूरी था.

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सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई कल

एएसजी नटराज ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक को हिरासत में लेते समय सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और किसी भी संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन नहीं हुआ है. सरकार ने दलील दी कि ऐसे मामलों में जहां सुरक्षा का सवाल हो, वहां न्यायिक समीक्षा की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को सुना है और मामले की अगली सुनवाई कल के लिए तय की है. अब देखना होगा कि अदालत सरकार के इन दावों पर क्या रुख अपनाती है और वांगचुक को राहत मिलती है या नहीं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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