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फ्लाइट से हुई गिद्ध की टक्कर, जानें कितना शक्तिशाली है ये पक्षी; माउंट एवरेस्ट से भी ऊंची है उड़ान

पटना से रांची जा रही 4000 फीट पर उड़ रही इंडिगो की फ्लाइट से गिद्ध की टक्कर हो गई, जिसके बाद विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। ऐसे में गिद्ध की उड़ने की क्षमता सभी के बीच कौतुहल का विषय बनी हुई है। दरअसल गिद्ध इससे भी ऊंचा उड़ सकता है और यह बेहद ही पावरफुल पक्षी होता है। आइए जानते हैं कि गिद्ध कितना शक्तिशाली होता है।

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Written By: News24 हिंदी Updated: Jun 2, 2025 20:00
Vulture power
फ्लाइट से टकराया गिद्ध photo Credit-pexels

गिद्ध एक ऐसा पक्षी है, जो अपनी गजब की उड़ान और ताकत के लिए मशहूर है। ये पक्षी माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर)  से भी ऊंचा उड़ने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही यह पर्यावरण को साफ रखने में भी बड़ा रोल निभाता है।

2 जून 2025 को, पटना से रांची जा रही इंडिगो की फ्लाइट की 4000 फीट पर एक गिद्ध से टक्कर हो गई, जिसके चलते विमान को रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। इस घटना ने गिद्ध की ताकत और विमानन सुरक्षा को लेकर चर्चा छेड़ दी है।

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काफी ऊंचा उड़ सकते हैं गिद्ध

गिद्ध, खासकर एंडियन गिद्ध और हिमालयी गिद्ध, अपनी उड़ान की गजब ऊंचाई के लिए जाने जाते हैं। ये पक्षी 10,000 मीटर (करीब 33,000 फीट) से भी ऊपर उड़ सकते हैं, जो माउंट एवरेस्ट से कहीं ज्यादा है।

दरअसल गिद्ध के पंख लंबे और चौड़े होते हैं, जो 3 मीटर तक फैल सकते हैं। ये पंख उन्हें गर्म हवाओं, यानी थर्मल एयर का इस्तेमाल करने में मदद करते हैं। सूरज की गर्मी से बनी ये हवाएं गिद्ध को बिना पंख फड़फड़ाए हवा में उड़ने देती हैं। इस तरह वो कम एनर्जी में लंबी दूरी और ऊंचाई तय कर लेते हैं।

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उनका सांस लेने का सिस्टम भी कमाल का होता है। गिद्ध के फेफड़े और खून में ऑक्सीजन ले जाने की ताकत ऐसी है कि वो कम ऑक्सीजन वाली ऊंचाई पर भी आसानी से उड़ सकते हैं। यही वजह है कि वो ऐसी जगहों पर पहुंच जाते हैं, जहां बाकी जीव मुश्किल से टिक पाते हैं।

गिद्ध की उड़ान की ताकत का एक और पहलू उनकी सहनशक्ति भी है। ये घंटों बिना रुके उड़ सकते हैं। चाहे हिमालय की ऊंची चोटियां हों या मैदानी इलाके, गिद्ध हर जगह भोजन की तलाश में निकल पड़ते हैं। उनकी ये खूबी उन्हें प्रकृति का एक शानदार शिकारी और सफाईकर्मी बनाती है।

गिद्ध में होती है इतनी पावर

गिद्ध की ताकत सिर्फ उड़ान तक नहीं है, उनकी शारीरिक खूबियां और पर्यावरण में उनका योगदान उन्हें खास बनाता है। गिद्ध की नजर इतनी तेज़ होती है कि वो कई किलोमीटर दूर से जमीन पर पड़े मरे हुए जानवरों को देख लेते हैं। उनकी आंखें गंध और हलचल को पकड़ने में माहिर होती हैं, जिससे भोजन ढूंढना उनके लिए आसान हो जाता है।

इसके अलावा, गिद्ध का पेट भी गजब का होता है। ये सड़ा-गला मांस खा सकते हैं, क्योंकि उनके पेट का एसिड बैक्टीरिया और वायरस को खत्म कर देता है। यही वजह है कि गिद्ध पर्यावरण को साफ रखने में इतना बड़ा रोल निभाते हैं। वो मरे हुए जानवरों को खाकर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।

गिद्ध की शारीरिक ताकत भी कम नहीं। उनके मजबूत पंख और शरीर उन्हें लंबी उड़ानें और मुश्किल हालात में टिकने की ताकत देते हैं। वो अपनी एनर्जी इतनी समझदारी से इस्तेमाल करते हैं कि उन्हें बार-बार खाना नहीं चाहिए। ये ताकत और सहनशक्ति उन्हें प्रकृति का एक दमदार योद्धा बनाती है।

कम हो गई है गिद्धों की तादाद

गिद्ध को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है। वो मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखते हैं और रेबीज जैसी बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। 1990 के दशक में भारत में डाइक्लोफेनाक दवा की वजह से गिद्धों की तादाद बहुत कम हो गई थी। इससे पर्यावरण में असंतुलन आया और बीमारियां बढ़ीं। गिद्धों का बचाव करना न सिर्फ पर्यावरण के लिए, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी ज़रूरी है। उनके ठिकानों को बचाना और हानिकारक दवाओं पर रोक लगाना उनकी तादाद बढ़ाने में मदद कर सकता है।

विमानन के लिए चुनौती है वर्ड स्ट्राइक

पक्षियों से टकराव, यानी बर्ड स्ट्राइक, विमानन के लिए एक बड़ी चुनौती है। गिद्ध जैसे बड़े पक्षी खास तौर पर खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि उनका आकार और ताकत विमान के इंजन, विंडशील्ड या नाक को नुकसान पहुंचा सकती है। इस खतरे को कम करने के लिए विमानों और हवाई अड्डों पर कई तरह के उपाय किए जाते हैं।

सबसे पहले, आजकल के विमान बर्ड स्ट्राइक झेलने के लिए खास तौर पर डिजाइन किए जाते हैं। उनके इंजन, विंडशील्ड और नाक मजबूत मटेरियल से बनाए जाते हैं, जो छोटे-मझोले पक्षियों की टक्कर को सह सकते हैं। लेकिन गिद्ध जैसे बड़े पक्षी ज्यादा नुकसान कर सकते हैं, इसलिए विमान डिजाइन में लगातार बेहतर की जा रही है।

दूसरा, कुछ हवाई अड्डों पर बर्ड डिटेक्शन रडार और सेंसर लगे होते हैं। ये सिस्टम पक्षियों की मौजूदगी को पकड़कर पायलटों को अलर्ट करते हैं, जिससे टकराव का खतरा कम हो जाता है।

तीसरा, हवाई अड्डों के आसपास कचरा और पानी के स्रोतों को कंट्रोल करना जरूरी है। गिद्ध जैसे पक्षी अक्सर मरे हुए जानवरों या कचरे की तलाश में हवाई अड्डों के पास आते हैं। कचरे को ढककर और आसपास साफ-सफाई रखकर इस खतरे को कम किया जा सकता है।

चौथा, कुछ हवाई अड्डे पक्षियों को भगाने के लिए सायरन या लेजर लाइट का इस्तेमाल करते हैं। ये तरीके पक्षियों को रनवे और उड़ान रास्तों से दूर रखने में मदद करते हैं।

आखिरी और सबसे जरूरी पायलटों का प्रशिक्षण है। उन्हें बर्ड स्ट्राइक जैसी आपात स्थिति में तुरंत सही फैसला लेने की ट्रेनिंग दी जाती है, जैसे कि सुरक्षित लैंडिंग करना। ये सारे उपाय मिलकर विमानन को सुरक्षित बनाते हैं।

First published on: Jun 02, 2025 08:00 PM

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