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UnderSea Internet Cables: 14 लाख KM लंबाई, 7 महाद्वीप… समुद्र के अंदर कहां-कहां बिछा इंटरनेट केबल का ‘जाल’? 7 पॉइंट में जानें डिटेल

UnderSea Internet Cables: समुद्र के अंदर लाखों किलोमीटर लंबी इंटरनेट केबल बिछी हैं, जिनके जरिए सातों महाद्वीपों को इंटरनेट सर्विस मिलती है। अगर होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में बिछी इंटरनेट केबल काट दी जाए तो एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के देशों में इंटरनेट कई महीनों के लिए ठप हो जाएगा।

UnderSea Internet Cables Explainer: मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग चल रही है। अमेरिका और इजरायल की सेना मिलकर ईरान पर हमले कर रही है। ईरान की सेना अरब देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रही है। इसके अलावा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक किया हुआ है। यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमले किए जा रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट में माइंस बिछा रखी हैं, जिनसे होर्मुज स्ट्रेट में बिछी इंटरनेट केबल को नुकसान पहुंच सकता है। अगर इंटरनेट केबल कट गईं तो भारत समेत कई देशों में इंटरनेट सर्विस कई महीानों के लिए ठप हो सकती है।

क्या और कैसी होती हैं इंटरनेट केबल?

बता दें कि समुद्र के अंदर पानी में बिछी इंटरनेट केबल को ‘अंडरसी इंटरनेट केबल’ या ‘सबमरीन केबल’ भी कहते हैं। अंडरसी इंटरनेट केबल देखने में मोटे पाइप जैसी हैं। इस केबल के अंदर बाल के जैसी महीन रेशे जैसे दिखने वाली फाइबर ऑप्टिक केबल होती हैं, जिनका गुच्छा बना होता है। इन फाइबर ऑप्टिकल केबल के जरिए फोटो, वीडियो और मैसेज प्रकाश की गति से दौड़ते हैं। यह इंटरनेट केबल इतनी मजबूत होती हैं कि पानी के दबाव और समुद्री नमक से खराब नहीं होतीं।

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2 महासागरों में इंटरनेट केबल का नेटवर्क

बता दें कि समुद्र के अंदर 2 महासागरों प्रशांत महसागर और अटलांटिक महासागर में करीब 14 लाख किलोमीटर लंबी इंटरनेट केबल बिछी हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक समेत कई नामी सोशल नेटवर्किंग साइट चलाने वाली कंपनियों ने इन तारों को बिछाया है। अटलांटिक महासागर से यूरोप और अमेरिका कनेक्ट हैं। प्रशांत महासागर से अमेरिका और एशिया कनेक्ट हैं। इन दोनों महासागरों से सातों महाद्वीपों पर बसे देशों को 95 प्रतिशत से ज्यादा इंटरनेट सर्विस उपलब्ध होती है।

भारत को कहां से इंटरनेट सर्विस मिलती?

बता दें कि लाल सागर में 17 इंटरनेट केबल और होर्मुज स्टेट में 20 इंटरनेट केबल बिछी हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट से AAE-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा-TGN गल्फ के लिए बिछी लाइनें हैं, जो भारत को विदेशी डेटा का कनेक्शन उपलब्ध कराती हैं। भारत को लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में बिछी इंटरनेट केबल से इंटरनेट सर्विस मिलती है। यह इंटरनेट केबल मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में बने केबल लैंडिंग स्टेशनों से कनेक्ट हैं और इन स्टेशनों के जरिए भारत को इंटरनेट मिलता है।

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2024 में लाल सागर में केबल कटी थी

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट का तो सबसे संकरा हिस्सा है, वह महज 200 फीट गहरा है। यहां इंटरनेट केबल उथले पानी के अंदर हैं, इसलिए यहां बिछी माइंस के ब्लास्ट होने से कटने पर या जानबूझकर काटने पर इंटरनेट सर्विस कई महीने ठप रह सकती है। साल 2024 में हमास-गाजा में युद्ध को समर्थन देते हुए हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इंटरनेट केबल को नुकसान पहुंचाया था। इस वजह से एशियाई और अफ्रीकी देशों में इंटरनेट की स्पीड बुरी तरह प्रभावित हुई थी और मरम्मत करने में महीनों लगे थे।

होर्मुज में केबल कटीं तो क्या असर पड़ेगा?

चेतावनी मिली है कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में चोक पॉइंट को और लाल सागर में चोक पॉइंट को हूती विद्रोहियों ने बंद कर दिया तो पूरे एशिया और अफ्रीका महाद्वीप पर इंटरनेट सर्विस बंद होगी। लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में इंटरने केबल कटने से अरब देशों का इंटरनेट सबसे पहले ठप होगा, लेकिन भारत और यूरोप को प्रशांत महासागर में दूर बिछी लाइनों से सर्विस लेनी होगी। इससे इंटरनेट स्लो होगा और बैंक, शेयर बाजार, एयरपोर्ट, अस्पताल, सरकारी ऑफिस और डिजिटल सर्विस बाधित होंगी।

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मोबाइल फोन तक कैसे पहुंचता इंटरनेट?

समुद्र के अंदर इंटरनेट केबल बिछाने के लिए एक्सपर्ट रूट का सर्वे करते हैं। समुद्र के नीचे की जमीन, चट्टानों और पहाड़ों का नक्शा बनाया जाता है। केबल बिछाने के लिए ऐसा रास्ता सेलेक्ट किया जाता है, जहां ज्वालामुखी और गहरे खड्डे में न हों। रूट फाइनल होने के बाद केबल लेयर समुद्री जहाज केबल बिछाते हैं। केबल बिछाने के बाद उन्हें प्लास्टिक या स्टील के खोल से ढक दिया जाता है। इन केबल से डेटा प्रकाश की गति से गुजरते हुए जमीन पर बने नेटवर्क या सेटेलाइट से कॉन्टैक्ट में आकर मोबाइल तक पहुंचता है।

सिग्नल बूस्ट करने के लिए रिपीटर लगाए जाते

बता दें कि जब डेटा हजारों किलोमीटर का सफर करके जमीन तक आता है तो सिग्नल काफी कमजोर होते हैं। इन सिग्लनों को बूस्ट करने के लिए हर 50 से 100 किलोमीटर की दूरी पर ‘रिपीटर’ लगाए जाते हैं। यह रिपीटर भारत में हाईवे-एक्सप्रेस पर लगे पेट्रोल पंप जैसे काम करते हैं, जो तेल कम होने से बंद होने लगी गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल देकर बूस्ट करते हैं। इंटरनेट केबल की उम्र करीब 25 साल की होती है और इन्हें समुद्री तूफानों, भूकंपों और समुद्री जहाजों से बचाने की व्यवस्था की जाती है।

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First published on: Mar 20, 2026 02:36 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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