भारतीय रेलवे ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक खुशखबरी लेकर आया है. दरअसल, रेलवे ने मुख्य रेल मार्गों पर ट्रेनों की रफ्तार को बढ़ाने के लिए सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव की योजना बनाई है. अब देश में पहली बार पूरे इतिहास में ट्रेनों की औसत गति 115 किलोमीटर प्रतिघंटा होने जा रही है. रेलवे के इस ऐतिहासिक कदम से यात्रियों का सफर कम से कम तीन घंटे तक कम हो जाएगा. साथ ही मानवीय चूक के कारण होने वाले रेलवे हादसों में भी कमी आएगी. बता दें कि इस परियोजना को 1 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
160 किमी प्रति घंटा रफ्तार का है लक्ष्य
रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जिन मार्गों पर ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक करने का लक्ष्य है, वहां मौजूदा पारंपरिक सिग्नलिंग व्यवस्था में बदलाव किए जाएंगे और अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (CTC) सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके तहत दो रेलवे सिग्नलों के बीच की दूरी लगभग एक किलोमीटर से बढ़ाकर दो किलोमीटर करने की तैयारी है. तेज गति से चलने वाली ट्रेनों के लिए यह बदलाव आवश्यक माना जा रहा है, क्योंकि ज्यादा स्पीड पर लोको पायलट को सिग्नल देखने, स्थिति का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से ट्रेन नियंत्रित करने के लिए अधिक दूरी चाहिए होती है.
अधिकारी ने यह भी बताया कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से लगभग 300 रेलवे स्टेशनों का नियंत्रण स्टेशन मास्टरों के हाथ में नहीं होगा और CTC के पास चला जाएगा.
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दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-कोलकाता रूट पर शुरू होगा प्रोजेक्ट
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सबसे पहले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-कोलकाता रूट पर की जाएगी. यदि परीक्षण सफल रहता है तो इस व्यवस्था को देश के अन्य रेलवे जोनों में भी लागू किया जाएगा. इसके साथ ही हाई-स्पीड संचालन के अनुरूप ट्रैक, ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाएगा.
अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-मुंबई (1,386 किमी) और दिल्ली कोलकाता (1,445 किमी) मार्ग के लगभग 300 से ज्यादा छोटे-बड़े स्टेशनों से सिग्नलिंग और पटरियों के नियंत्रण का अधिकार अभी स्थानीय रेलवे स्टेशन के मास्टरों के पास है. लेकिन अब नई व्यवस्था के लागू होने से CTC के माध्यम से ही 500 किमी से ज्यादा दूरी तक ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन किया जा सकेगा.
रेलवे का टारगेट ट्रेन की हाई स्पीड
रेलवे का लक्ष्य दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता रूट पर 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वंदे भारत जैसी सेमी हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन करना है. लेकिन मैन्युअल स्टेशन कंट्रोल और पारंपरिक सिग्नल सिस्टम के कारण ट्रेन को 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें प्रतिक्रिया समय बहुत कम होता है.