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‘मर्दों से ज्यादा काम करती हैं महिलाएं…’, मैटरनिटी लीव पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं और गोद लेने वाली महिलाओं को मैटरनिटी लीव से वंचित करना गलत है. कोर्ट ने पुराने नियम को असंवैधानिक बताते हुए बड़ा फैसला सुनाया.

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Written By: Varsha Sikri Updated: Mar 17, 2026 23:48
Supreme Court on Maternity Leave
Credit: Social Media

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चों की मां को भी 12 हफ्तों की छुट्टी मिलना अनिवार्य है, फिर चाहे बच्चे की उम्र कितनी भी हो. इस दौरान कोर्ट ने ये कहा है कि कामकाजी महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में ज्यादा घंटे काम करती हैं. दरअसल, एक कानूनी नियम में ये कहा गया था कि सिर्फ वही महिलाएं मैटरनिटी लीव की हकदार होंगी, जो तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लें. सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि ये नियम भेदभावपूर्ण है.

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सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा?

कोर्ट ने साफ कहा कि मां बनने का अधिकार सिर्फ बायोलॉजिकल तक सीमित नहीं है. गोद लेने वाली महिलाओं भी समान रूप से बच्चे की देखभाल करती हैं और उन्हें भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलना चाहिए. इस दौरान कोर्ट ने ये भी कहा कि बच्चे की उम्र के आधार पर मैटरनिटी लीव देने से इनकार करना सही नहीं है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के काम के बोझ पर भी अहम टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि महिलाएं ऑफिस के काम के अलावा घर और परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं, जिससे उनके कुल काम का समय पुरुषों से ज्यादा हो जाता है. इस तरह महिलाओं के अनपेड काम को भी मान्यता देना जरूरी है.

ये महिलाओं की गरिमा से जुड़ा है- SC

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि मैटरनिटी लीव सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार है, जो उनकी गरिमा, समानता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में मैटरनिटी लीव को संवैधानिक अधिकार बता चुका है. इस फैसले को कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. खासकर उन महिलाओं के लिए जो गोद लेकर मां बनती हैं, अब उन्हें भी बराबरी का दर्जा और सुविधाएं मिलेंगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये फैसला ना सिर्फ महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय को भी बढ़ावा देगा.

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First published on: Mar 17, 2026 11:47 PM

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