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मतगणना से पहले TMC को SC से झटका, काउंटिंग में केंद्रीय कर्मियों की तैनाती पर रोक से इनकार

supreme court rejects tmc plea: पश्चिम बंगाल में मतगणना प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने दखल देने से साफ मना कर दिया है.

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Edited By : Vijay Jain Updated: May 2, 2026 12:06
Supreme Court TMC vs ECI, Counting Supervisor, Kapil Sibal, Election Commission

supreme court rejects tmc plea : पश्चिम बंगाल में मतगणना की प्रक्रिया को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. चुनाव आयोग द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों को ‘काउंटिंग सुपरवाइजर’ नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (ECI) को अपने अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है और वह उनके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा.

सिब्बल की दलील और कोर्ट की टिप्पणी

सिब्बल ने चुनाव आयोग के नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले से ही माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि मतगणना प्रक्रिया में मौजूद है, तो दूसरे प्रतिनिधि की काउंटिंग एजेंट के तौर पर क्या जरूरत है? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान सभी दलों के काउंटिंग एजेंट वहां मौजूद रहेंगे, जो एक सामान्य प्रक्रिया है। सुनवाई के दौरान एक बड़ा मुद्दा काउंटिंग सुपरवाइजर और एजेंटों की निष्पक्षता को लेकर उठा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि काउंटिंग सुपरवाइजर और एजेंट केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, तो उनकी नियुक्ति को गलत कैसे कहा जा सकता है? कोर्ट ने आगे कहा कि सरकारी कर्मचारी तो सरकारी कर्मचारी होते हैं—उनकी निष्ठा किसी एक राजनीतिक दल के प्रति कैसे हो सकती है?

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चुनाव आयोग (ECI) की ओर से वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने अदालत को बताया कि मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) अंततः राज्य सरकार के ही होते हैं और वही यह तय करते हैं कि काउंटिंग सुपरवाइजर कौन होगा।

दूसरी ओर, कपिल सिब्बल ने टीएमसी की दलील को मजबूती से रखते हुए चुनाव आयोग के 13 अप्रैल के सर्कुलर का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयोग का खुद का नियम यह कहता है कि काउंटिंग सुपरवाइजर की नियुक्ति में ‘रैंडमाइजेशन’ की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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13 अप्रैल का सर्कुलर ही रहेगा प्रभावी

सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस जे. बागची की बेंच ने कहा कि इस मामले में किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग द्वारा 13 अप्रैल 2026 को जारी किए गए सर्कुलर का पूरी तरह से पालन किया जाए. कोर्ट के इस रुख से साफ है कि काउंटिंग सुपरवाइजर की नियुक्ति की प्रक्रिया में अब कोई बदलाव नहीं होगा और यह चुनाव आयोग के मौजूदा नियमों के तहत ही संपन्न होगी. इस फैसले को ममता बनर्जी की सरकार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो लगातार मतगणना प्रक्रिया में राज्य के कर्मचारियों की भागीदारी की मांग कर रही थी.

First published on: May 02, 2026 11:42 AM

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