Deepak Pandey
मैं 12 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं। दैनिक जागरण और हिंदुस्तान समेत कई संस्थानों में काम कर चुका हूं। इस वक्त न्यूज 24 डिजिटल में कार्यरत हूं।
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दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके सरकारी बंगले से मिले बेहिसाब कैश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा के खिलाफ आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गहन जांच करनी चाहिए और उन प्रावधानों से अवगत कराना चाहिए, जो इस तरह के आरोपों की जांच के लिए इन-हाउस कमेटी के गठन की अनुमति देते हैं।
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इससे पहले मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार की शाम को बैठक की और दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस ट्रांसफर करने का फैसला किया। आदिश अग्रवाल ने एएनआई से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को गहन जांच करनी चाहिए। ट्रांसफर में कुछ भी गलत नहीं है।
इस बीच एससीबीए के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने आंतरिक जांच की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जज यशवंत वर्मा के खिलाफ आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी। आपको बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगने की सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची। आग बुझाने के दौरान टीम ने उनके घर में भारी मात्रा में नकदी देखी। दमकल विभाग के कर्मियों ने इसकी सूचना अपने बड़े अधिकारियों को दी, जिससे यह मामला सुर्खियों में आ गया।
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