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‘100 दिन परिवार के साथ’, सेना में सुसाइड रोकने का सरकार का बड़ा कदम, राज्यसभा में दी जानकारी

100-Day Leave Policy: सुसाइड करने वाले करीब 80% जवान ऐसे थे जो घर से छुट्टी से लौटकर आए थे। पिछले साल 55000 से अधिक ने जवानों ने इस्तीफा दिया या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है।

Suicide Deaths In Paramilitary Forces Rise: अर्धसैनिक बलों में आत्महत्या रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने 100 दिन की छुट्टी पॉलिसी पेश की है। बुधवार को गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में ये जानकारी दी। गृहमंत्रालय के अनुसार वह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अधिक से अधिक कर्मियों को अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिले।

जवान ले रहे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ये हैं कारण 

दरअसल, एक रिपोर्ट में ये पता चला कि लंबे समय तक ड्यूटी करने, नींद की कमी आदि अन्य कारणों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में तैनात जवान आत्महत्या कर रहे हैं और अपनी सेवा पूरी करने से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले रहे हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 730 जवानों ने आत्महत्या की है, और करीब 55000 से अधिक ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है।

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सुसाइड करने वाले 80% जवान छुट्टी से लौटकर आए थे

रिपोर्ट में आगे ये भी कहा गया कि जवानों में आत्महत्या के कई निजी कारण भी सामने आए। बताया गया कि सुसाइड करने वाले करीब 80% ऐसे लोग थे जो घर से छुट्टी से लौटकर आए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि जांच में पता चला कि पत्नी या परिवार के सदस्य की मौत, वैवाहिक कलह या तलाक, वित्तीय कठिनाइयां और बच्चों के लिए अपर्याप्त शिक्षा के अवसर न मिल पाने के कारण बलकर्मियों ने सुसाइड की।

सैन्य अधिकारी जवानों से करें नियमित संवाद

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा को बताया कि इस साल अक्टूबर तक 6302 कर्मियों ने अपने परिवार के साथ 100 दिन बिताए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सैन्य अधिकारियों को सैनिकों की शिकायतों का पता लगाने और उनका समाधान करने के लिए उनसे नियमित संपर्क में रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा ड्यूटी के घंटों को बैलेंस रखने, सैनिकों को पर्याप्त आराम मिले ये सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया गया है।

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First published on: Dec 04, 2024 05:57 PM

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About the Author

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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