INDIA Alliance Crisis: संसद के भीतर विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है. दो साल पहले हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को कड़ी टक्कर देने वाला यह विपक्षी गठबंधन आज अपने सबसे बड़े अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है. आंतरिक कलह, हालिया चुनावी हार और घटक दलों के पाला बदलने के कारण लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 के नीचे गिरने की कगार पर पहुंच गया है.
विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे
हाल ही में 22 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने विपक्षी गठबंधन का साथ छोड़ दिया है, जिससे लोकसभा में इंडिया की ताकत 2024 के 234 सांसदों से घटकर पहले ही 209 पर आ चुकी है. अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई के बागी होने की खबरों ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है. अगर ऐसा होता है तो विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे चला जाएगा.
विपक्ष के इस पतन से उत्साहित होकर भाजपा लोकसभा में अपने दम पर साधारण बहुमत का 272 का आंकड़ा पार करने की रणनीति बना रही है. फिलहाल भाजपा के पास 240 सांसद हैं. यदि टीएमसी के बागी सांसदों का विलय होता है, तो भाजपा बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगी. संकट सिर्फ लोकसभा तक ही सीमित नहीं है; राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के बीच विभाजन की पूरी संभावना बनी हुई है. इन बदलते समीकरणों के कारण राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई (2/3) बहुमत के बेहद करीब पहुंच रहा है.
दोनों सदनों में सरकार का विधायी रास्ता साफ होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कई महत्वाकांक्षी और लंबित विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाएगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह केवल समय की बात है कि सरकार महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को दोबारा संसद में पेश कर पास करा लेगी, जिन्हें पिछले सत्र में विपक्ष ने एकजुट होकर रोक दिया था.
'इंडिया' गठबंधन का शासन 6 राज्यों में सिमटा
लगातार मिली चुनावी शिकस्त (हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी) के कारण विपक्षी दलों में घोर निराशा का माहौल है. इस राजनीतिक कुप्रबंधन के चलते क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस के नेतृत्व की क्षमता पर से भरोसा उठ गया है और अब 'इंडिया' गठबंधन का शासन देश के गिने-चुने 6 राज्यों (जम्मू-कश्मीर, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल) में ही सिमट कर रह गया है.
INDIA Alliance Crisis: संसद के भीतर विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है. दो साल पहले हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को कड़ी टक्कर देने वाला यह विपक्षी गठबंधन आज अपने सबसे बड़े अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है. आंतरिक कलह, हालिया चुनावी हार और घटक दलों के पाला बदलने के कारण लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 के नीचे गिरने की कगार पर पहुंच गया है.
विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे
हाल ही में 22 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने विपक्षी गठबंधन का साथ छोड़ दिया है, जिससे लोकसभा में इंडिया की ताकत 2024 के 234 सांसदों से घटकर पहले ही 209 पर आ चुकी है. अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई के बागी होने की खबरों ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है. अगर ऐसा होता है तो विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे चला जाएगा.
विपक्ष के इस पतन से उत्साहित होकर भाजपा लोकसभा में अपने दम पर साधारण बहुमत का 272 का आंकड़ा पार करने की रणनीति बना रही है. फिलहाल भाजपा के पास 240 सांसद हैं. यदि टीएमसी के बागी सांसदों का विलय होता है, तो भाजपा बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगी. संकट सिर्फ लोकसभा तक ही सीमित नहीं है; राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के बीच विभाजन की पूरी संभावना बनी हुई है. इन बदलते समीकरणों के कारण राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई (2/3) बहुमत के बेहद करीब पहुंच रहा है.
दोनों सदनों में सरकार का विधायी रास्ता साफ होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कई महत्वाकांक्षी और लंबित विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाएगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह केवल समय की बात है कि सरकार महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को दोबारा संसद में पेश कर पास करा लेगी, जिन्हें पिछले सत्र में विपक्ष ने एकजुट होकर रोक दिया था.
‘इंडिया’ गठबंधन का शासन 6 राज्यों में सिमटा
लगातार मिली चुनावी शिकस्त (हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी) के कारण विपक्षी दलों में घोर निराशा का माहौल है. इस राजनीतिक कुप्रबंधन के चलते क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस के नेतृत्व की क्षमता पर से भरोसा उठ गया है और अब ‘इंडिया’ गठबंधन का शासन देश के गिने-चुने 6 राज्यों (जम्मू-कश्मीर, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल) में ही सिमट कर रह गया है.