ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही चुनौतियों पर खुलकर बात की. पुतिन ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आजकल की होड़ काफी बदसूरत रूप ले चुकी है और यह सब सरकारी स्तर पर देखने को मिल रहा है.
अपने संबोधन में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि कभी-कभी विरोध और प्रतिस्पर्धा शारीरिक नुकसान तक पहुंच जाती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पाइपलाइनों को नष्ट किया जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को रोकने और समुद्री जहाजों को जब्त करने की कोशिशें की जा रही हैं. इसके अलावा कई अवैध पाबंदियां लगाई जा रही हैं और उन देशों को ‘सेकेंडरी प्रतिबंधों’ की धमकी दी जा रही है जो किसी और के इशारे पर चलने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं.
‘रूस पर लगे दुनिया के बाकी देशों से दोगुने प्रतिबंध’
पुतिन ने प्रतिबंधों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक रूस पर 30,000 से अधिक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि यह संख्या दुनिया के बाकी सभी देशों पर मिलकर लगाए गए कुल प्रतिबंधों से भी दोगुनी है. रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए हर संभव कदम उठाया गया. रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि इन तमाम मुश्किल परिस्थितियों और दबाव के बावजूद रूस ने मजबूती से काम किया और बड़ी सफलता हासिल की है. पुतिन ने कहा, “हमने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता को और मजबूत किया है. हम अपने भरोसेमंद और स्थिर साझेदारों के साथ रिश्ते लगातार बढ़ा रहे हैं.”
उन्होंने आर्थिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रूस की आर्थिक विकास दर दुनिया के औसत से भी बेहतर रही है, जो यह साबित करता है कि भारी पाबंदियों के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.
पुराने लीडर्स की जगह अब नए देश बनेंगे ग्रोथ का इंजन
पुतिन ने अपने संबोधन में दुनिया की बदलती आर्थिक स्थिति पर एक बेहद अहम बात कही है. पुतिन ने साफ कहा कि इस समय पूरी दुनिया गहरे और बुनियादी बदलावों के दौर से गुजर रही है. दशकों तक दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले ताकतवर देश अब नए उभरते देशों से पीछे छूट रहे हैं. पुतिन ने कहा कि 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में जिन देशों को आर्थिक तरक्की का अगुआ माना जाता था, अब उनकी जगह आर्थिक विकास के नए इंजन तैयार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब वे ‘पुराने लीडर्स’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो यह सिर्फ कहने का एक औपचारिक तरीका है, लेकिन हर कोई अच्छी तरह समझता है कि उनका इशारा किन देशों की तरफ है.
पुराने देशों के पास ताकत है, लेकिन बदलाव तय है
रूसी राष्ट्रपति ने माना कि इन तथाकथित पुराने लीडर देशों के पास आज भी कई मजबूत पहलू मौजूद हैं. उनके पास बेहतरीन और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है, आधुनिक टेक्नोलॉजी का बड़ा फायदा है और लंबे समय से विकसित मजबूत वैज्ञानिक संस्थान व रिसर्च की व्यवस्था है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती. पुतिन ने कहा कि दुनिया का हमेशा एक ही ढर्रे पर टिके रहना न तो इंसानी फितरत है और न ही अर्थव्यवस्था का नियम. अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए पुतिन ने रेखांकित किया कि दुनिया हमेशा बदलती रहती है और यही प्रकृति का नियम है. आर्थिक संतुलन में आ रहा यह गहरा और ऐतिहासिक बदलाव इसी स्वाभाविक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, जिसे रोका नहीं जा सकता.
वैश्विक मंच पर दबाव की राजनीति नहीं चलेगी
पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिबंधों और पाबंदियों के जरिए किसी देश की अर्थव्यवस्था को दबाने का दौर अब खत्म हो चुका है. ब्रिक्स देश आपसी सहयोग, मजबूत व्यापार और निष्पक्ष नीतियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं. पश्चिमी देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद ब्रिक्स देशों का आपसी तालमेल और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है.
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