Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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Pune Hit And Run Case : महाराष्ट्र के पुणे में बीती 18 मई को एक नाबालिग ने लग्जरी कार से 2 लोगों को रौंद दिया था। हादसे के दौरान नाबालिग नशे में था। मामले में आरोपी को तो जमानत मिल गई है लेकिन उसके पिता समेत 3 लोगों को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पिता को पता था कि बेटे के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है फिर भी उसने कार बेटे को दे दी। इस रिपोर्ट में जानिए कि नाबालिग को गाड़ी देना कितना खतरनाक है और इसे लेकर कानून क्या कहता है।
पोर्श कार हादसा: नाबालिग के पिता को पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया#PuneAccident #BigBreaking #ViralStory pic.twitter.com/dwHrHrHH1K
— News24 (@news24tvchannel) May 22, 2024
नाबालिग आरोपी ने अपनी पोर्श कार से बाइक से जा रहे अनीष अवधिया और अश्विनी कोस्टा को टक्कर मार दी थी। घटना में दोनों की मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में आरोपी नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 और 77 के तहत मामला दर्ज किया है। बता दें कि धारा 75 बच्चों से क्रूरता और 77 उन्हें नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने से संबंधित है। वहीं, नाबालिग के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और मोहर व्हीकल एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।
क्या कहता है कानून?
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199ए के अनुसार अगर अपराध में कोई नाबालिग संलिप्त है तो ऐसे में दोषी उसके माता-पिता या फिर अभिभावक या गाड़ी के मालिक को माना जाता है। कानून ये मानकर चलता है कि नाबालिग को गाड़ी देने में इनमें से किसी एक की सहमति थी। इस स्थिति में दोषी पाए जाने पर 3 साल जेल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा उन्हें यह भी साबित करना होता है कि नाबालिग ने जो अपराध किया है उस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
Pune Hit & Run Case
FIR में Motor Vehicle Act का सेक्शन 185- शराब पीकर गाड़ी चलाना यानी ड्रिंक एंड ड्राइव का चार्ज जोड़ा है.#motorvehicleact #hit&run pic.twitter.com/pW8t3aFDmW
— Brij Dwivedi (@Brij17g) May 22, 2024
कानून के अनुसार जिस गाड़ी के जरिए नाबालिग ने अपराध को अंजाम दिया उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन 1 साल के लिए कैंसिल कर दिया जाता है। इसके अलावा आरोपी को तब तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाता जब तक कि उसकी उम्र 25 साल नहीं हो जाती। बता दें कि साल 2019 में एक्ट में संशोधन हुआ था। इसके तहत नाबालिगों के लिए धारा जोड़ी गई थी। इस धारा में नाबालिग की ओर से किए गए अपराध के लिए माता-पिता, अभिभावक या गाड़ी मालिक को जिम्मेदार तय किया गया था।
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