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वंदे मातरम् पर चर्चा : "हिम्मत है तो…" प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर पलटवार, पढ़िए 10 बड़े वार

लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा की शुरुआत पीएम मोदी ने की थी. इसके बाद चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा.

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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भाजपा पर साधा निशाना.

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 साल होने पर लोकसभा में चर्चा की गई. लोकसभा में इस चर्चा की शुरुआत पीएम मोदी ने की थी. पीएम मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस और जवाहर लाल नेहरू पर खूब हमला बोला था. जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की बारी आई तो उन्होंने भी पीएम मोदी और भाजपा पर निशाना साधा. प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम् पर बंगाल चुनाव की वजह से बहस हो रही है. उन्होंने कहा कि यह सरकार मौजूदा मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है. इसलिए यह वर्तमान और भविष्य की बात ना करते हुए हमेशा अतीत की बात करती है.

BJP पर प्रियंका गांधी ने ऐसे साधा निशाना

  • हम यह बहस आज दो वजहों से कर रहे हैं, पहला बंगाल का चुनाव आ रहा है. हमारे प्रधानमंत्री उसमें अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं. इसके पीछे दूसरा मकसद है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी, उन पर सरकार नए आरोप लादने का मौका चाहती है. देश का ध्यान ज्वलंत मुद्दों से भटकाना चाहती है. आपका मकसद है कि हम फिर से उसी अतीत में भंडराते रहें, उसी ओर देखते रहें, जो हो चुका है, जो बीत चुका है. यह सरकार वर्तमान और भविष्य की ओर देखना ही नहीं चाहती है. वे इस काबिल ही नहीं रहे.
  • आज मोदी जी वह प्रधानमंत्री नहीं रहे, जो एक समय में थे. सच यह है कि ये दिखने लगा है. उनका आत्मविश्वास घटने लगा है. उनकी नीतियां देश को कमजोर कर रही हैं. मेरे सत्तापक्ष के साथी इसलिए चुप हैं क्योंकि अंदर-अंदर से वे भी इस बात से सहमत हैं. आज देश के लोग खुश नहीं हैं. तमाम समस्याओं से घिरे हुए हैं. उन समस्याओं का हल आप निकाल नहीं रहे हैं.
  • आपका शासन दमन का शासन है. आपकी राजनीति दिखावे की राजनीति है. इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति है, चुनाव से चुनाव तक की राजनीति है, ध्यान भटकाने वाले मुद्दों की राजनीति है. वंदे मातरम् इस देश की उन्हीं उम्मीदों की गुहार है, जिन्हें आपका शासन हर रोज ठुकरा रहा है. आज भी सीमा पर कोई जवान दुश्मन के सामने होता है तो उसके सीने में वंदे मातरम् गूंजता है, आज भी जब हमारा खिलाड़ी इंटरनेशनल खेलों में जाता है तो उसके दिल की धड़कन में वंदे मातरम् होता है. आज भी इस देश के करोड़ों देशवासी जब अपने राष्ट्रीय ध्वज को देखते हैं तो उनकी जबान पर वंदे मातरम् होता है.
  • कांग्रेस के हर एक अधिवेशन में 1905 से लेकर आज तक सामूहिक तौर पर वंदे मातरम् गाया जाता है. आप बताइए कि क्या आपके अधिवेशन में गाया जाता है? देश की आत्मा के इस महामंत्र को विवादित करके, आप बहुत बड़ा पाप कर रहे हैं. इस पाप में कांग्रेस पार्टी शामिल नहीं होगी. यह राष्ट्र गीत हमेशा से हमें प्यारा है, हमेशा से हमारे लिए पवित्र रहा है, हमेशा रहेगा.
  • आज की बहस सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए की जा रही है. क्योंकि यह सरकार वर्तमान की वसीयत को छिपाना चाह रही है. आज देश का युवा परेशान है, पेपर लीक हो रहे हैं, बेरोजगारी है, महंगाई इतनी बढ़ी गई है. इसकी चर्चा हम सदन में क्यों नहीं कर रहे. आरक्षण के साथ हो रहे खिलवाड़ की चर्चा हम क्यों नहीं कर रहे. महिलाओं की बात होती है तो बड़े-बड़े ऐलान होते हैं, लेकिन उनकी हालात सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते.
  • हम यहां बैठकर छोटी-छोटी बातें करेंगे. हम अतीत की बातें करते हैं, बार-बार पीछे देखते हैं, लेकिन भविष्य और वर्मतान की बातें नहीं करते. हिम्मत है तो भविष्य की बात कीजिए, बात कीजिए कि पेपर लीक क्यों होते हैं, बेरोजगारी क्यों है? हम देश के लिए हैं, आप चुनाव के लिए हैं. हम जितने भी चुनाव हारें, यहां बैठे रहेंगे, आपसे लड़ते रहेंगे, आपकी विचारधारा से लड़ते रहेंगे. अपने इस देश, अपनी मिट्टी के लिए लड़ते रहेंगे, आप हमें रोक नहीं सकते.
  • आज जिस विषय पर हम चर्चा कर रहे हैं. वह केवल एक विषय नहीं है, भारत की आत्मा का एक हिस्सा है. हमारा राष्ट्रगीत उस भावना का प्रतीक है, जिसने गुलामी में सोए हुए भारत के लोगों को जगाया. जिसने उन्हें हिम्मत दी कि ब्रिटिश साम्राज्य के सामने खड़े होकर, सत्य और अहिंसा के नैतिक हथियारों के साथ सामना कर पाएं. आज यह चर्चा एक भावना के ऊपर है. और जब हम वंदे मातरम् का नाम लेते हैं तो वही भावना उजागर होती है. हमें उस पूरे इतिहास की याद आती है, जो स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास था. उसकी पीड़ा, उसका संघर्ष, उसका साहस, उसकी नैतिकता की याद दिलाता है, जिसके सामने ब्रिटिश साम्राज्य झुक गया था.
  • हमारा राष्ट्र गान भी एक लंबी कविता का एक अंश ही है. इन दोनों के अंश चुनने में भूमिका रवींद्रनाथ टैगोर की थी. वंदे मातरम् के इस स्वरूप पर सवाल उठाना, जिसे संविधान सभा ने मंजूर किया, ना सिर्फ उन महापुरुषों का अपमान करना है, जिन्होंने अपने महान विवेक से यह फैसला किया. मगर एक संविधान विरोधी मंशा को भी उजागर करता है. क्या सत्ता पक्ष के हमारे साथी इतने अहंकारी हो गए हैं कि वे खुद को महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, रवींद्रनाथ टैगोर, भीमराव अंबेडकर, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस से बड़ा समझने लगे हैं. मोदी जी का अपने भाषण में यह कहना कि राष्ट्र गीत को एक विभाजनकारी सोच द्वारा काटा गया, उन सभी महापुरुषों का अपमान है. जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस देश को दे दिया.
  • 28 अक्तूबर 1937 में कांग्रेस की कार्यसमीति ने अपने प्रस्ताव में वंदे मातरम् के उन्हीं दो अंतरों को राष्ट्र गीत घोषित किया था. इस बैठक में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, आचार्य नरेंद्र देव, सरदार पटेल, गुरुदेव रवींद्र टैगोर, सरदार पटेल सब मौजूद थे. इस प्रस्ताव पर ये सभी महापुरुष सहमत थे. आजादी के बाद जब इसी गीत के इन्हीं दो अंतरों को राजेंद्र प्रसाद ने संविधान समिति में राष्ट्र गीत घोषित किया. तब करीब-करीब ये ही महापुरुष मौजूद थे. इनके साथ-साथ भीमराव अंबेडकर भी सभा में मौजूद थे. और मेरे सत्तापक्ष के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी मौजूद थे. उस वक्त किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई.
  • जितने साल नरेंद्र मोदी को पीएम के पद पर हो गए, करीब-करीब उतने ही वर्ष नेहरू जेल में रहे थे. इस देश की आजादी के लिए. आपको नेहरू से जितनी भी शिकायतें हैं या उन्हें जिनती गालियां देनी हैं, उसकी एक लिस्ट बना लीजिए. फिर हम एक समय तय करते हैं और उस पर बहस करेंगे. लेकिन उसके बाद यह मुद्दा खत्म हो जाना चाहिए. फिर हमें जनता के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करनी होगी.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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