बिहार विधानसभा के सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के लोगों के बीच जमकर आरोप प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला. पहले बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कड़ा कटाक्ष किया था. जिसके बाद अब सीएम सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव पर पलटवार किया है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि यह उनकी पाठशाला है. उन्हें सलाह है कि बपौती वाली सोच से बाहर निकलिए. सत्ता किसी की बपौती नहीं है. मुख्यमंत्री का पद 14 करोड़ बिहारियों का आशीर्वाद है और इसीलिए आज मैं यहां बैठा हूं. नीतीश कुमार, पीएम मोदी जी, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जितनराम मांझी का आशीर्वाद प्राप्त है तब यहां बैठा हूं. किसी गलतफहमी में मत रहिए.
तेजस्वी यादव ने क्या कहा था?
बता दें कि इससे पहले तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार में भले ही सम्राट चौधरी भाजपा के मुख्यमंत्री हों लेकिन उनके सीएम बनने से संघ-आरएसएस के लोग खुश नहीं हैं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाई सम्राट चौधरी ने पगड़ी उतार दी है. लेकिन, उनको मेरी सलाह है कि वह अपनी पगड़ी संभालकर रखें. उस पगड़ी पर विजय सिन्हा की कड़ी नजर है.
उन्होंने आगे कहा कि इस सरकार में टॉप तीन में जो लोग हैं उनमें कोई ओजिनल भाजपाई नहीं है. सम्राट चौधरी लालू की पाठशाला से निकले हैं तो विजय चौधरी कांग्रेस से आए हैं. वहीं बिजेंद्र यादव जनता दल से जुड़े रहे हैं. इनमें से कोई भी भाजपा की पाठशाला से नहीं निकले हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस सरकार में भाजपा का असली संगठन कहां है. उन्होंने आगे कहा कि हम लोग संतुष्ट हैं. लेकिन ओरिजनल भाजपा के लोग थोड़े ठगे हुए और पीड़ित महसूस कर रहे हैं.
विधानसभा का विशेष सत्र
तेजस्वी यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान अपने भाषण में सत्ता पक्ष पर खूब कटाक्ष किया. एनडीए सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर भाजपा पहले से तय कर लेती कि उनका अपना मुख्यमंत्री होगा, तो विशेष सत्र बुलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. उन्होंने जेडीयू के पुराने नारे 25 से 30 फिर से नीतीश का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि भाजपा नीतीश कुमार को लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं रहने देगी. उन्होंने कहा कि इलेक्टेड सीएम को सेलेक्टेड सीएम ने रिप्लेस कर दिया है.
नीतीश कुमार ने लालू जी को सीएम बनाया
सम्राट चौधरी ने अपने ऊपर मुकदमा के आरोपों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार नहीं होते तो लालू यादव कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाते. लालू जी को नीतीश कुमार जी ने ही मुख्यमंत्री बनाया. यह जानकारी इन लोगों को होनी चाहिए. मेरी राजनीति में लालू यादव जी का अत्याचार नहीं होता तो मैं बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बन पाता.
गलतफहमी में नहीं रहे कोई
उन्होंने कहा कि भाजपा के बारे में कोई बात नहीं करे. पार्टी ने मुझे विपक्ष का नेता बनाया, फिर पार्टी का अध्यक्ष बनाया, दो-दो बार डिप्टी सीएम बनाया और आज मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया. किसी गलतफहमी में ना रहें, पूरी पार्टी एक है. हमारे दल में कोई किसी के विरोध में नहीं है. पूरा एनडीए एक साथ मिलकर बिहार के विकास के लिए काम कर रहा है.
बिहार विधानसभा के सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के लोगों के बीच जमकर आरोप प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला. पहले बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कड़ा कटाक्ष किया था. जिसके बाद अब सीएम सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव पर पलटवार किया है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि यह उनकी पाठशाला है. उन्हें सलाह है कि बपौती वाली सोच से बाहर निकलिए. सत्ता किसी की बपौती नहीं है. मुख्यमंत्री का पद 14 करोड़ बिहारियों का आशीर्वाद है और इसीलिए आज मैं यहां बैठा हूं. नीतीश कुमार, पीएम मोदी जी, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जितनराम मांझी का आशीर्वाद प्राप्त है तब यहां बैठा हूं. किसी गलतफहमी में मत रहिए.
तेजस्वी यादव ने क्या कहा था?
बता दें कि इससे पहले तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार में भले ही सम्राट चौधरी भाजपा के मुख्यमंत्री हों लेकिन उनके सीएम बनने से संघ-आरएसएस के लोग खुश नहीं हैं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाई सम्राट चौधरी ने पगड़ी उतार दी है. लेकिन, उनको मेरी सलाह है कि वह अपनी पगड़ी संभालकर रखें. उस पगड़ी पर विजय सिन्हा की कड़ी नजर है.
उन्होंने आगे कहा कि इस सरकार में टॉप तीन में जो लोग हैं उनमें कोई ओजिनल भाजपाई नहीं है. सम्राट चौधरी लालू की पाठशाला से निकले हैं तो विजय चौधरी कांग्रेस से आए हैं. वहीं बिजेंद्र यादव जनता दल से जुड़े रहे हैं. इनमें से कोई भी भाजपा की पाठशाला से नहीं निकले हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस सरकार में भाजपा का असली संगठन कहां है. उन्होंने आगे कहा कि हम लोग संतुष्ट हैं. लेकिन ओरिजनल भाजपा के लोग थोड़े ठगे हुए और पीड़ित महसूस कर रहे हैं.
विधानसभा का विशेष सत्र
तेजस्वी यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान अपने भाषण में सत्ता पक्ष पर खूब कटाक्ष किया. एनडीए सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर भाजपा पहले से तय कर लेती कि उनका अपना मुख्यमंत्री होगा, तो विशेष सत्र बुलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. उन्होंने जेडीयू के पुराने नारे 25 से 30 फिर से नीतीश का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि भाजपा नीतीश कुमार को लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं रहने देगी. उन्होंने कहा कि इलेक्टेड सीएम को सेलेक्टेड सीएम ने रिप्लेस कर दिया है.
नीतीश कुमार ने लालू जी को सीएम बनाया
सम्राट चौधरी ने अपने ऊपर मुकदमा के आरोपों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार नहीं होते तो लालू यादव कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाते. लालू जी को नीतीश कुमार जी ने ही मुख्यमंत्री बनाया. यह जानकारी इन लोगों को होनी चाहिए. मेरी राजनीति में लालू यादव जी का अत्याचार नहीं होता तो मैं बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बन पाता.
गलतफहमी में नहीं रहे कोई
उन्होंने कहा कि भाजपा के बारे में कोई बात नहीं करे. पार्टी ने मुझे विपक्ष का नेता बनाया, फिर पार्टी का अध्यक्ष बनाया, दो-दो बार डिप्टी सीएम बनाया और आज मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया. किसी गलतफहमी में ना रहें, पूरी पार्टी एक है. हमारे दल में कोई किसी के विरोध में नहीं है. पूरा एनडीए एक साथ मिलकर बिहार के विकास के लिए काम कर रहा है.