भारत में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ती नजर आ रही है. International Monetary Fund (IMF) के एशिया-प्रशांत विभाग के डायरेक्टर कृष्णा श्रीनिवासन ने हाल ही में संकेत दिया है कि ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी का असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होना तय माना जा सकता है.
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श्रीनिवासन ने क्या कहा?
दरअसल, कृष्णा श्रीनिवासन 5 मई को नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई तो बाजार ठप पड़ सकता है. दरअसल, भारत अपनी कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका सीधा असर देश के ईंधन बाजार पर पड़ता है. अगर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहेगा. परिवहन महंगा होने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दूध और बाकी जरूरी सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
आम लोगों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
इससे महंगाई दर बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए ये स्थिति ज्यादा मुश्किल पैदा कर सकती है. ऐसे हालात में सरकार के सामने कीमतों को कंट्रोल करने की बड़ी चुनौती होती है. सरकार चाहे तो एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है या तेल कंपनियों को राहत देकर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर सकती है. हालांकि, इन कदमों से सरकारी खजाने पर असर पड़ता है, इसलिए हर फैसला सोच-समझकर लिया जाता है. साथ ही, सरकार लंबे समय में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके.
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