National Testing Agency: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी क्वेश्चन पेपर तैयार करने वाले एक्सपर्ट के पैनल में बदलाव कर रही है और इसके लिए 4 स्टेज वाली स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू कर रही है. इस नए सिस्टम के तहत, विशेषज्ञों को पैनल में शामिल करने से पहले उनकी क्वालिफिकेशन, विषय की जानकारी, प्रोफेशनल बैकग्राउंड, ईमानदारी और हितों के टकराव की संभावनाओं के आधार पर परखा जाएगा. ये कदम NEET-UG और UGC-NET जैसी बड़ी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद एग्जामिनेशन सिस्टम को मजबूत करने की बड़ी कोशिश के तहत उठाया गया है, जिसमें तकरीबन 600 एक्सपर्ट्स को हटाया गया था.
4 स्टेज में होगी स्क्रीनिंग
स्टेज 1: एलिजिबिलिटी और डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन
पहला स्टेज बेसिक एलिजिबिलिटी और दस्तावेजों की जांच पर फोकस्ड होगा. एप्लिकेंट को अपनी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और प्रोफेशनल एक्सपीरिएंस का सबूत देना होगा, साथ ही आधार और पैन जैसे पहचान पत्र भी जमा करने होंगे. नौकरी की डिटेल्स और मौजूदा एम्प्लॉयर से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) भी जरूरी होगा. इसके अलावा, उम्मीदवारों को गोपनीयता और हितों के टकराव से जुड़े डेक्लेरेशन भी जमा करने होंगे.
स्टेज 2: सब्जेक्ट एक्सपर्टीज असेसमेंट
शुरुआती स्क्रीनिंग पास करने वाले कैंडिडेट्स का इवैल्यूएशन NTA की तरफ से नियुक्त सब्जेक्ट कमेटी की तरफ किया जाएगा. उनके एजुकेशनल बैकग्राउंड, रिसर्च के काम, परीक्षा के क्वेश्चन तैयार करने के तजुर्बा और संबंधित विषय की समझ का आकलन किया जाएगा. इस स्टेज का मकसद ये तय करना है कि क्या उम्मीदवारों के पास क्वेश्चन पेपर तैयार करने के लिए जरूरी एक्सपर्टीज है या नहीं.
स्टेज 3: बैकग्राउंड और ईमानदारी की जांच
सिर्फ एकेडमिक एक्सपर्टीज ही सिलेक्शन की गारंटी नहीं होगी. NTA एप्लिकेंट के शैक्षणिक और रोजगार रिकॉर्ड की अलग से जांच करेगा. अंतिम निर्णय लेने से पहले ईमानदारी, गोपनीयता और हितों के टकराव की संभावनाओं के बारे में उनके डेक्लेरेशन की भी जांच की जाएगी.
स्टेज 4: 3 साल के लिए पैनल में शामिल करना
जो एक्सपर्ट 3 स्टेज पास कर लेंगे, उन्हें खास विषयों और परीक्षा से जुड़े रोल्स के लिए NTA के पैनल में शामिल किया जाएगा. पैनल में शामिल होने की ये इंतेजाम 3 साल तक मान्य रहेगी, बशर्ते प्रदर्शन संतोषजनक हो और नियमों का पालन किया जाए. रूल्स के तोड़ने पर NTA इसे समय से पहले खत्म भी कर सकता है.
एग्जाम रिफॉर्म की कोशिश
ये बदलाव NTA के उस ब्रॉडर रिफॉर्म का हिस्सा हैं जिसका मकसद राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर भरोसा और पारदर्शिता को बेहतर बनाना है. क्वेश्चन पेपर तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स आमतौर पर 7 से 15 दिनों तक काम करते हैं और अपनी सेवाओं के लिए सालाना तकरीबन 35,000 से 40,000 रुपये पाते हैं.
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