भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस कर रहा है और इसके लिए भारत जल्द ही अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रहा है. इस योजना के तहत जल्द ही 50 से ज्यादा नए जासूसी सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे. इनके माध्यम से रात के समय और घने बादलों के बीच भी साफ तस्वीरें ली जा सकेंगी. दरअसल ये फैसला पिछले साल पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान हुई दिक्कतों के कारण लिया गया है.
वहीं, ब्लूमबर्ग ने इस मामले के जानकार लोगों के हवाले से जानकारी दी है और लिखा है कि नरेंद्र मोदी सरकार विदेशों में ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने को लेकर भी काम कर रही है. संभावित स्थानों में मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और स्कैंडिनेवियाई देश शामिल हैं. इन स्टेशनों पर लगी सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं पर व्यापक तरीके से विश्वास किया जा सकेगा, हालांकि इस सिस्टम को लगाने के लिए मेजबान देशों की मंजूरी भी जरूरी होगी.
स्पेस-बेस्ट सर्विलांस-3 पर है फोकस
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 (SBS-3) कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 52 सैटेलाइट को तेजी से लॉन्च करने की तैयारी है. पहला बैच अप्रैल तक अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है. इस प्रणाली से भारत उन संवेदनशील क्षेत्रों पर कहीं ज्यादा बार नजर रख सकेगा, जहां मौजूदा तकनीक के कारण निगरानी अंतराल कई दिनों का होता है.
वहीं, इससे पहले मिंट ने अप्रैल में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन के चेन्नई में एक इवेंट में दिए गए बयान का हवाला देते हुए बताया था कि भारत अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 150 नए सैटेलाइट तैनात करने की योजना बना रहा है.
भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस कर रहा है और इसके लिए भारत जल्द ही अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रहा है. इस योजना के तहत जल्द ही 50 से ज्यादा नए जासूसी सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे. इनके माध्यम से रात के समय और घने बादलों के बीच भी साफ तस्वीरें ली जा सकेंगी. दरअसल ये फैसला पिछले साल पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान हुई दिक्कतों के कारण लिया गया है.
वहीं, ब्लूमबर्ग ने इस मामले के जानकार लोगों के हवाले से जानकारी दी है और लिखा है कि नरेंद्र मोदी सरकार विदेशों में ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने को लेकर भी काम कर रही है. संभावित स्थानों में मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और स्कैंडिनेवियाई देश शामिल हैं. इन स्टेशनों पर लगी सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं पर व्यापक तरीके से विश्वास किया जा सकेगा, हालांकि इस सिस्टम को लगाने के लिए मेजबान देशों की मंजूरी भी जरूरी होगी.
स्पेस-बेस्ट सर्विलांस-3 पर है फोकस
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 (SBS-3) कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 52 सैटेलाइट को तेजी से लॉन्च करने की तैयारी है. पहला बैच अप्रैल तक अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है. इस प्रणाली से भारत उन संवेदनशील क्षेत्रों पर कहीं ज्यादा बार नजर रख सकेगा, जहां मौजूदा तकनीक के कारण निगरानी अंतराल कई दिनों का होता है.
वहीं, इससे पहले मिंट ने अप्रैल में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन के चेन्नई में एक इवेंट में दिए गए बयान का हवाला देते हुए बताया था कि भारत अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 150 नए सैटेलाइट तैनात करने की योजना बना रहा है.