स्वाद भी बदला और रंग भी! जानिए कैसे गायब हो रही 'फलों के राजा' की मिठास; क्या है इसके पीछे वजह

भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि गर्मियों का एक अहसास और परंपरा है। लेकिन उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक के बागों में अब यह परंपरा टूटती नजर आ रही है. दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश होने के नाते, भारत का 24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और करोड़ों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर इस फसल से जुड़ी है. 200 लाख टन से ज्यादा आम पैदा होता है. 'क्लाइमेट ऑन माई प्लेट' की इस कड़ी में आइए जानते हैं कि कैसे बदलता मौसम हमारे प्रिय 'फलों के राजा' को हमसे दूर कर रहा है.

Mangoes Front
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भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि गर्मियों का एक अहसास और परंपरा है। लेकिन उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक के बागों में अब यह परंपरा टूटती नजर आ रही है. दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश होने के नाते, भारत का 24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और करोड़ों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर इस फसल से जुड़ी है. 200 लाख टन से ज्यादा आम पैदा होता है. 'क्लाइमेट ऑन माई प्लेट' की इस कड़ी में आइए जानते हैं कि कैसे बदलता मौसम हमारे प्रिय 'फलों के राजा' को हमसे दूर कर रहा है.

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आम के लिए सही मौसम

आम के लिए सही मौसम2 / 8

आम को खिलने के लिए ठंडी सर्दियों और फल लगने के दौरान सूखे मौसम की जरूरत होती है. फूल आने के समय 24-27 डिग्री तापमान सबसे सटीक माना जाता है. इस समय बारिश और ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए.

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बेमौसम बारिश की मार

बेमौसम बारिश की मार3 / 8

उत्तराखंड और यूपी के बागों में फूल आने के समय हुई बेमौसम बारिश ने गड़बड़ कर दिया. अधिक नमी से फंगल इन्फेक्शन और बीमारियां बढ़ती हैं, जो पूरी फसल बर्बाद कर सकती हैं.

तेज हवा का कहर

तेज हवा का कहर4 / 8

इसके अलावा इस दौरान बेशक बारिश ना हो रही हो लेकिन हवाएं तेज चले, तब भी फल पकने से पहले ही गिर सकते हैं.

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भीषण गर्मी का कहर

भीषण गर्मी का कहर5 / 8

हद से ज्यादा गर्मी आम की पैदावार पर बहुत असर डालती है. साल 2024 में उत्तर भारत में लगातार हीटवेव चली थीं. इससे मई और जून में करीब 25 दिनों तक लगातार तापमान 41 से 47 डिग्री के बीच रहा. गर्मी के कारण फलों का टेक्सचर बदल गया और 'टिप बर्निंग' जैसी समस्याएं सामने आईं.

तापमान और पैदावार का रिलेशन

तापमान और पैदावार का रिलेशन6 / 8

शोध बताते हैं कि न्यूनतम तापमान में केवल 1°C की बढ़ोतरी से आम की पैदावार 11% तक गिर सकती है. बढ़ती गर्मी परागण के समय को भी कम कर देती है.

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बाहर से ठीक, भीतर से खराब

बाहर से ठीक, भीतर से खराब7 / 8

क्लाइमेट चेंज की वजह से आमों में 'स्पंजी टिश्यू' की समस्या बढ़ी है. इसमें फल बाहर से ठीक दिखता है, लेकिन अंदर का गूदा खराब और बदरंग हो जाता है.

कीटों का बसेरा

कीटों का बसेरा8 / 8

गर्म होता वातावरण खतरनाक कीटों के पनपने में मदद कर रहा है. इस वजह से इंटरनेशनल मार्केट में भारतीय आमों के एक्सपोर्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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