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भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि गर्मियों का एक अहसास और परंपरा है। लेकिन उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक के बागों में अब यह परंपरा टूटती नजर आ रही है. दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश होने के नाते, भारत का 24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और करोड़ों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर इस फसल से जुड़ी है. 200 लाख टन से ज्यादा आम पैदा होता है. 'क्लाइमेट ऑन माई प्लेट' की इस कड़ी में आइए जानते हैं कि कैसे बदलता मौसम हमारे प्रिय 'फलों के राजा' को हमसे दूर कर रहा है.
आम के लिए सही मौसम

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आम को खिलने के लिए ठंडी सर्दियों और फल लगने के दौरान सूखे मौसम की जरूरत होती है. फूल आने के समय 24-27 डिग्री तापमान सबसे सटीक माना जाता है. इस समय बारिश और ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए.
बेमौसम बारिश की मार

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उत्तराखंड और यूपी के बागों में फूल आने के समय हुई बेमौसम बारिश ने गड़बड़ कर दिया. अधिक नमी से फंगल इन्फेक्शन और बीमारियां बढ़ती हैं, जो पूरी फसल बर्बाद कर सकती हैं.
तेज हवा का कहर

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इसके अलावा इस दौरान बेशक बारिश ना हो रही हो लेकिन हवाएं तेज चले, तब भी फल पकने से पहले ही गिर सकते हैं.
भीषण गर्मी का कहर

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हद से ज्यादा गर्मी आम की पैदावार पर बहुत असर डालती है. साल 2024 में उत्तर भारत में लगातार हीटवेव चली थीं. इससे मई और जून में करीब 25 दिनों तक लगातार तापमान 41 से 47 डिग्री के बीच रहा. गर्मी के कारण फलों का टेक्सचर बदल गया और 'टिप बर्निंग' जैसी समस्याएं सामने आईं.
तापमान और पैदावार का रिलेशन

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शोध बताते हैं कि न्यूनतम तापमान में केवल 1°C की बढ़ोतरी से आम की पैदावार 11% तक गिर सकती है. बढ़ती गर्मी परागण के समय को भी कम कर देती है.
बाहर से ठीक, भीतर से खराब

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क्लाइमेट चेंज की वजह से आमों में 'स्पंजी टिश्यू' की समस्या बढ़ी है. इसमें फल बाहर से ठीक दिखता है, लेकिन अंदर का गूदा खराब और बदरंग हो जाता है.
कीटों का बसेरा

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गर्म होता वातावरण खतरनाक कीटों के पनपने में मदद कर रहा है. इस वजह से इंटरनेशनल मार्केट में भारतीय आमों के एक्सपोर्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है.