मानसून को लेकर बड़ी भविष्यवाणी, इस साल गर्मी भी तोड़ेगी रिकॉर्ड, EL Nino बारिश-लू को कैसे करेगा प्रभावित?

Monsoon Prediction 2026: गर्मी में लू और उसम काा कितना असर रहेगा? इस बार मानसून में कितनी बारिश होगी? मौसम वैज्ञानिकों ने एल नीनो के एक्टिव होने और गर्मी-मानसून पर इसके असर को लेकर भविष्यवाणी की है।

Monsoon Prediction 2026

मानसून में इस बार कम बारिश के कारण सूखा रह सकता है।

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Heat Wave And Monsoon Rain Update: भारत में मार्च के महीने में ही भीषण गर्मी पड़ रही है। दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 से 40 के बीच चल रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का तापमान मार्च में ही 40 डिग्री तक पहुंचने लगा है। यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स के मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो के एक्टिव होने और समय के साथ इसके काफी मजबूत होने की भविष्यवाणी की है। इस मौसमी बदलाव का सबसे ज्यादा असर भारत में गर्मी और मानसून पर पड़ेगा।

रिकॉर्ड तोड़ने वाली भीषण गर्मी पड़ सकती

संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो के कारण इस बार भारत में भीषण से अति भीषण रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी पड़ सकती है। वहीं इस बार कमजोर मानसून के कारण सूखे जैसी स्थिति रह सकती है। वैश्विक मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमानों के अनुसार,संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो के कारण इस बार भारत में भीषण से अति भीषण रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी पड़ सकती है। वहीं इस बार कमजोर मानसून के कारण सूखे जैसी स्थिति रह सकती है। जून से अगस्त के बीच अल नीनो के उभरने की 60 प्रतिशत संभावना है और साल खत्म होते-होते यह सबसे मजबूत स्थिति में होगा।

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अल नीनो से मानसून सीजन प्रभावित होगा

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्र प्रशांत महासागर पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अगर अल नीनो मजबूत होता है तो यह वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करना शुरू कर देगा और इसमें भारत का मानसून सीजन भी शामिल है। खासकर वर्षा ऋतु का दूसरा भाग प्रभावित होगा, जो अगस्त और सितंबर के आस-पास होता है और मानसून का सीजन होता है। अल नीनो तब एक्टिव होता है, जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह गर्म हो जाती है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बहने वाली नमी ले जाने वाली हवाएं कमजोर होती हैं।

गर्म हवाओं के कारण कमजोज मानसून संभव

वहीं हवा में नमी कम होने से मानसून कमजोर या बाधित हो सकता है। अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर से सटे एक हिस्से में समुद्री तूफान और भारी बारिश का दौर रहता है। दूसरे हिस्से में लू चलती है और बारिश कम होने से सूखा रहता है। क्योंकि प्रशांत महासागर पूरी दुनिया की जलवायु, मौसम और तापमान को प्रभावित करता है, इसलिए अल नीनो का प्रभाव प्रशांत महासागर से बहुत दूर भारतीय उपमहाद्वीप समेत कई देशों में भीषण गर्मी के रूप में देखा जा सकता है। इसलिए भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून पर अल नीनो के असर की चिंता वैज्ञानिकों को है।

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क्या अल नीनो के कारण सूखा पड़ सकता है?

मौसम वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि अल नीनो के असर से भारत में मानसून कमजोर होगा, इसकी गारंटी नहीं दे सकते, लेकिन बारिश कम हो सकती है। पिछले कुछ सीजन में भारत में अल नीनो की स्थिति में भी मानसून के सीजन में सामान्य बारिश हुई है। अल नीनो से बारिश की कमी का खतरा तो बढ़ता है, लेकिन मानसून के कमजोर होने की गारंटी नहीं है। लेकिन अगर अल नीनो शुरुआत में ही मजबूत हो गया तो बारिश सामान्य से कम हो सकती है। क्योंकि मानसून सीजन में साल की 70 प्रतिशत बारिश होती है तो कम बारिश कई राज्यों में सूखे की स्थिति बना सकती है।

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उत्तरी और मध्य भारत में लू का प्रकोप रहेगा

भारत का ग्रीष्मकालीन मानसून जमीन और महासागर के तापमान के अंतर पर निर्भर करता है। अल नीनो के दौरान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लाने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं। यदि पूर्वानुमान के अनुसार मजबूत अल नीनो विकसित होता है तो इससे उत्तरी और मध्य भारत में लू चलने की संभावना बढ़ सकती है। शक्तिशाली अल नीनो वैश्विक तापमान को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा सकता है। इससे पहले 1997-98 और 2015-16 में भी दुनियाभर में मौसमी घटनाओं को जन्म दिया था और वैश्विक तापमान को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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