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घाटी में टार्गेट किलिंग को लेकर महबूबा मुफ्ती बोलीं- राजौरी जैसे हमलों से विशेष पार्टी को फायदा होता है

आसिफ सुहाफ, श्रीनगर: राजौरी में टार्गेट किलिंग की निंदा करते हुए पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की हत्या जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है। मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग बंदूकों के बीच फंस गए हैं। महबूबा […]

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आसिफ सुहाफ, श्रीनगर: राजौरी में टार्गेट किलिंग की निंदा करते हुए पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की हत्या जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है।

मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग बंदूकों के बीच फंस गए हैं। महबूबा मुफ्ती ने बिना बीजेपी का नाम लिए कहा कि राजौरी जैसे हमले और गैर-मुस्लिमों की हत्या से देश में एक खास पार्टी को फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि ये वो पार्टी जो लोगों को बांटती है और धर्म के नाम पर नफरत पैदा करती है।

फारूक अब्दुल्ला बोले- पाक से बातचीत जरूरी

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर फारूक अब्दुल्ला ने राजौरी हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि हमलावर उस पार से आ रहे हैं और जब तक हम (भारत) उनसे (पाकिस्तान) बात नहीं करते हैं और एक साथ समाधान नहीं खोजते हैं तो हम इन हमलों को रोक नहीं सकते।

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फारूक अब्दुल्ला ने हमले को देश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कथित नफरत से भी जोड़ा और कहा कि नैनीताल में क्या हो रहा है, मुसलमानों को बेघर किया जा रहा है और कोई इसके बारे में नहीं बोलता है।

अब्दुला ने आत्मनिरीक्षण का किया आह्वान

अब्दुल्ला ने आत्मनिरीक्षण का आह्वान करते हुए कहा, “धर्म के आधार पर समुदायों को विभाजित करने की कोशिश करने वाले तत्व हैं, लेकिन हिंसा हमें कहीं नहीं ले जाएगी। हमें इस नफरत को रोकने के तरीके खोजने की जरूरत है।”

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फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि “पिछली बार जब कश्मीरी पंडितों की टारगेट किलिंग हुई थी, मैंने एलजी को लिखा था और उनसे सर्वदलीय बैठक बुलाने और इस मुद्दे का हल निकालने का आग्रह किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।” फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि बीजेपी कह रही थी कि अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद मौजूद है, लेकिन अब क्या हुआ, अनुच्छेद के निरस्त होने के बाद से आतंकवादी गतिविधियां और बढ़ गई हैं।

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First published on: Jan 02, 2023 03:03 PM
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