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‘मुस्लिमों को डराने की हो रही कोशिश’, मस्जिदों की प्रोफाइलिंग पर महबूबा मुफ्ती का बड़ा हमला

मस्जिदों की प्रोफाइलिंग के मुद्दे पर महबूबा मुफ्ती ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि इसके जरिए मुस्लिम समुदाय को डराने और दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है. पढ़िये श्रीनगर से आसिफ सुहाफ की रिपोर्ट.

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जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में मस्जिदों की प्रोफाइलिंग किए जाने की खबरों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर एक खास समुदाय को निशाना बना रही है और यह सब मुस्लिमों को उनके धर्म से दूर करने और डराने के लिए किया जा रहा है. महबूबा ने सवाल उठाया कि अगर प्रोफाइलिंग इतनी ही जरूरी है तो इसकी शुरुआत मंदिरों और चर्चों से क्यों नहीं की गई. उनके मुताबिक मस्जिदें सभी के लिए खुली रहती हैं और वहां किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है इसलिए वहां इस तरह की जांच का कोई मतलब नहीं बनता है.

शिया-सुन्नी के सवालों पर खड़ी की आपत्ति

मस्जिदों से जुड़े एक प्रोफार्म की चर्चा करते हुए महबूबा ने बताया कि इसमें मौलवियों से उनकी निजी जानकारी और धार्मिक विचारधारा के बारे में पूछा जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि शिया या सुन्नी जैसे संप्रदायों के बारे में जानकारी मांगना एक खतरनाक मानसिकता को बढ़ावा देता है जिससे समाज में बंटवारा हो सकता है. उनका मानना है कि कश्मीर में शुरू किया गया यह सिलसिला जल्द ही पूरे देश में फैल सकता है क्योंकि सरकार ने अब तक इस गंभीर मुद्दे पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है. महबूबा का दावा है कि इस तरह की हरकतों से सम्मानजनक नागरिकों और धार्मिक गुरुओं को मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है.

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सुरक्षा के नाम पर उत्पीड़न का लगाया गंभीर आरोप

गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी की तैयारियों के बीच महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन पूर्व आतंकियों को भी थानों में बुला रही है जो अपनी सजा काटकर मुख्यधारा में लौट चुके हैं और अब शांति से जीवन जी रहे हैं. महबूबा ने इसे सीधे तौर पर उत्पीड़न करार दिया और कहा कि बिना किसी ठोस वजह के लोगों की गिरफ्तारियां और कर्मचारियों को नौकरी से निकालना गलत है. उनके मुताबिक राज्य में नफरत का माहौल चरम पर पहुंच गया है जिससे आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है.

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दी नसीहत

मौजूदा राजनीतिक हालात पर बोलते हुए महबूबा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील की कि अगर बाकी लोग चुप हैं तो उन्हें कम से कम अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और सिंधु जल समझौते पर बीजेपी के सुर में सुर मिलाना प्रदेश के हित में नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के दौर में बिजली परियोजनाओं को एनएचपीसी को सौंपने के फैसले की याद दिलाई जिससे कश्मीर को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. महबूबा ने पूछा कि क्या उमर सरकार उन पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी.

First published on: Jan 15, 2026 08:30 PM

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About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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