पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान दिया है, जिसने भारतीय नागरिकता साबित करने पर एक नई बहस छेड़ दी है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है. इसे भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता. मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता के प्रमाण के लिए संबंधित कानून और आधिकारिक रिकॉर्ड - जैसे नागरिकता प्रमाणपत्र, रिकॉर्ड ऑफ रजिस्ट्रेशन, और पंजीकृत जन्म‑दस्तावेज - को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक 'ट्रैवल डॉक्यूमेंट' है, जिसे सरकार द्वारा केवल अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को सुगम बनाने के लिए जारी किया जाता है. इसका मतलब यह है कि केवल पासपोर्ट का होना ही नागरिकता को परिभाषित नहीं करता है.
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इस बयान के बाद इस बहस के तेज होने की आशंका है कि नागरिकता स्थापित करने के लिए कौन‑से दस्तावेज मान्य और निर्णायक होंगे.
यह स्थिति अपने आप में एक विरोधाभास पैदा करती है, क्योंकि नियम के मुताबिक पासपोर्ट किसी गैर-नागरिक को जारी नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, पासपोर्ट मिलने का मतलब यह भी नहीं है कि आप उसके मालिक हैं. पासपोर्ट के पिछले हिस्से पर साफ लिखा होता है कि यह 'भारत सरकार की संपत्ति' है और सरकार के आदेश देने पर इसे कभी भी वापस सौंपना पड़ सकता है.
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रिकॉर्ड समय में बन रहे हैं पासपोर्ट
इस स्पष्टीकरण के साथ-साथ विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब पासपोर्ट रिकॉर्ड समय में बन रहे हैं. मंत्रालय ने बताया कि देश में चिप-बेस्ड ई-पासपोर्ट का सफल रोलआउट हो चुका है. साल 2025 में कुल 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें से केवल पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ थी.
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अब कई मामलों में पासपोर्ट 5-6 कार्यदिवस में मिल रहा है और पासपोर्ट सेवा केंद्र पर आवेदनकर्ता को 45 मिनट से भी कम समय लग रहा है.
यह भी पढ़ें : Passport New Rules: बदल गए नियम, अब बिना अपॉइंटमेंट बनेगा पासपोर्ट; जानें किसे मिलेगा फायदा
तो फिर कानूनन भारत का नागरिक कौन?
भारतीय नागरिकता कानूनों के तहत, नागरिकता के नियम जन्म के वर्ष के आधार पर तय होते हैं. 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच देश में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति जन्म से भारतीय है. 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता तभी मिल सकती है, जब उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो.
3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्म लेने वाले बच्चे तभी जन्म से नागरिकता का दावा कर सकते हैं, जब उनके माता-पिता दोनों भारतीय हों, या फिर एक नागरिक हो और दूसरा जन्म के समय अवैध अप्रवासी न हो.
पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान दिया है, जिसने भारतीय नागरिकता साबित करने पर एक नई बहस छेड़ दी है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है. इसे भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता. मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता के प्रमाण के लिए संबंधित कानून और आधिकारिक रिकॉर्ड – जैसे नागरिकता प्रमाणपत्र, रिकॉर्ड ऑफ रजिस्ट्रेशन, और पंजीकृत जन्म‑दस्तावेज – को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक ‘ट्रैवल डॉक्यूमेंट’ है, जिसे सरकार द्वारा केवल अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को सुगम बनाने के लिए जारी किया जाता है. इसका मतलब यह है कि केवल पासपोर्ट का होना ही नागरिकता को परिभाषित नहीं करता है.
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इस बयान के बाद इस बहस के तेज होने की आशंका है कि नागरिकता स्थापित करने के लिए कौन‑से दस्तावेज मान्य और निर्णायक होंगे.
यह स्थिति अपने आप में एक विरोधाभास पैदा करती है, क्योंकि नियम के मुताबिक पासपोर्ट किसी गैर-नागरिक को जारी नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, पासपोर्ट मिलने का मतलब यह भी नहीं है कि आप उसके मालिक हैं. पासपोर्ट के पिछले हिस्से पर साफ लिखा होता है कि यह ‘भारत सरकार की संपत्ति’ है और सरकार के आदेश देने पर इसे कभी भी वापस सौंपना पड़ सकता है.
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रिकॉर्ड समय में बन रहे हैं पासपोर्ट
इस स्पष्टीकरण के साथ-साथ विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब पासपोर्ट रिकॉर्ड समय में बन रहे हैं. मंत्रालय ने बताया कि देश में चिप-बेस्ड ई-पासपोर्ट का सफल रोलआउट हो चुका है. साल 2025 में कुल 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें से केवल पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ थी.
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अब कई मामलों में पासपोर्ट 5-6 कार्यदिवस में मिल रहा है और पासपोर्ट सेवा केंद्र पर आवेदनकर्ता को 45 मिनट से भी कम समय लग रहा है.
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तो फिर कानूनन भारत का नागरिक कौन?
भारतीय नागरिकता कानूनों के तहत, नागरिकता के नियम जन्म के वर्ष के आधार पर तय होते हैं. 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच देश में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति जन्म से भारतीय है. 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता तभी मिल सकती है, जब उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो.
3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्म लेने वाले बच्चे तभी जन्म से नागरिकता का दावा कर सकते हैं, जब उनके माता-पिता दोनों भारतीय हों, या फिर एक नागरिक हो और दूसरा जन्म के समय अवैध अप्रवासी न हो.