जस्टिस सुब्बा रेड्डी सट्टी ने कहा है कि कोर्ट में किसी आपराधिक मामले के लंबित होने पर पासपोर्ट को रिन्यू करने या जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता। जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान नहीं लेती, तब तक उस मामले को भारतीय पासपोर्ट कानून के तहत लंबित न्यायिक कार्यवाही नहीं माना जा सकता।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने इनकार किया

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16 साल के नाबालिग की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को दिए गए आवेदन की डिटेल तलब की। क्योंकि पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के आपराधिक मामले में नाम आने का उल्लेख था, जिस पर पासपोर्ट कार्यालय ने स्पष्टीकरण मांगते हुए पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार कर दिया था।
आंध्र प्रदेश की सरकार ने रखा पक्ष

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आंध्र प्रदेश सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि संबंधित मामले में पुलिस ने अभी तक अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट नहीं की है और न ही मामले में अभी तक अदालत ने संज्ञान लिया तो जस्टिस रेड्डी ने कहा कि बेशक याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, लेकिन अभी तक कोर्ट ने मामले में संज्ञान नहीं लिया है। इसलिए इसे लंबित आपराधिक कार्यवाही नहीं माना जा सकता, जो पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6(2)(फ) के तहत पासपोर्ट जारी करने में बाधा बने।
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जस्टिस ने दिया पुराने फैसले का हवाला

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जस्टिस रेड्डी ने पुराने केस में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी आपराधिक मामले में कोर्ट के द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाता, तब तक यह नहीं कह सकते कि व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही लंबित है। जब तक किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। इसलिए केवल आपराधिक मामला लंबित होना पासपोर्ट रिन्यू करने की प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकता। विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में शामिल है।