'जज भगवान नहीं होते, गलतियां हो सकती हैं', SC से रिटायरमेंट पर भावुक हुए जस्टिस संजय करोल

सुप्रीम कोर्ट से रिटायरमेंट के मौके पर पर जस्टिस संजय करोल अपने विदाई समारोह में भावुक हो गए और कहा कि जज इंसान हैं, भगवान नहीं. उन्होंने 40 साल के सफर को याद करते हुए न्याय में मानवीय संवेदना और विनम्रता को सबसे अहम बताया. अब वे एक ‘साधारण नागरिक’ की भूमिका में लौट रहे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट से रिटायरमेंट के मौके पर जस्टिस संजय करोल हुए भावुक। File Pic Credit: ANI

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‘जज कोई भगवान नहीं होते, उनसे भी गलतियां हो सकती हैं और हर फैसला हमेशा सही नहीं हो सकता’ यह कहना था सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल का. अपने विदाई समारोह के दौरान जस्टिस संजय करोल बेहद भावुक नजर आए. चार दशक लंबे अपने कानूनी और न्यायिक सफर को याद करते हुए जस्टिस करोल ने कहा कि न्याय देने की प्रक्रिया में मानवीय संवेदना और विनम्रता का होना सबसे जरूरी है.

जस्टिस करोल ने कहा कि संविधान सिर्फ कानून लागू करने के लिए नहीं, बल्कि उसे न्यायपूर्ण तरीके से लागू करने की सीख देता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोर्ट में आने वाली फाइलें और याचिकाएं केवल मामले के तथ्य बता सकती हैं, लेकिन वे उस इंसान के दर्द और उम्मीद को पूरी तरह बयां नहीं कर पातीं. न्याय सिर्फ कानूनी दलीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पुकार को सुनने का नाम है जो शब्दों के बीच की खामोशी में छिपी होती है.

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40 साल का लंबा सफर, 19 साल संभाली जज की कुर्सी

जस्टिस करोल ने अपने 40 साल के करियर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने एक वकील के रूप में शुरुआत की थी और पिछले 19 वर्षों तक जज की जिम्मेदारी निभाई. वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश , त्रिपुरा और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद 6 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. विदाई के पलों में भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि अब वे देश के सबसे बड़े और सम्मानित संवैधानिक पद यानी ‘एक साधारण नागरिक’ के रूप में वापस लौट रहे हैं.

सीजेआई ने की प्रशासनिक और न्यायिक नेतृत्व की तारीफ

इस विदाई समारोह में भारत के CJI सूर्यकांत, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने उनके योगदान की सराहना की. सीजेआई ने कहा कि जस्टिस करोल का न्यायिक जीवन कानून के प्रति निष्ठा और आम लोगों के प्रति संवेदनशीलता से भरा रहा. उन्होंने याद दिलाया कि त्रिपुरा हाईकोर्ट में रहते हुए जस्टिस करोल ने बेहतर प्रबंधन से महज 10 महीनों के भीतर 60 हजार लंबित मामलों को घटाकर 27 हजार से भी कम कर दिया था.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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