क्या है जनविश्वास बिल 2.0? जिसमें व्यापार से जुड़े 350 छोटे अपराधों में अब नहीं मिलेगी सजा, आज लोकसभा में होगा पेश

व्यापारियों के लिए खुशखबरी है। लोकसभा में आज जनविश्वास (संशोधन) 2.0 बिल पेश होने वाला है। इसमें 350 नियमों में संशोधन किया जाएगा। कई बदलाव के तहत अब छोटे अपराधों में सजा नहीं मिलेगी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

लोकसभा में पेश होगा जनविश्वास बिल 2.0

लोकसभा में पेश होगा जनविश्वास बिल 2.0

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Jan Vishwas Bill 2.0: लोकसभा में 18 अगस्त का दिन व्यापारियों के लिए बेहद अहम है। लोकसभा में जनविश्वास (संशोधन) 2.0 बिल पेश होने वाला है। इस बिल में 350 से ज्यादा से संसोधन शामिल हैं। इसमें अब छोटे अपराधों में सजा का प्रावधान खत्म किया जाएगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल लोकसभा में बिल पेश करेंगे। इस बिल के पास होने से व्यापारियों को सर्वाधिक फायदा मिलेगा। इससे पहले भी सरकार व्यापार से जुड़े 183 छोटे अपराधों में सजा खत्म कर चुकी है। माना जा रहा है कि इस बदलाव से देश में बिजनेस के लिए अनुकूल माहौल बनेगा।

केवल सजा नहीं लेकिन गैरकानूनी रहेंगे

नए बिल में व्यापार से जुड़े 350 नियमों में संशोधन होगा। इस बिल में व्यापार से जुड़े नियमों में छोटे अपराधों से सजा खत्म की जा सकती है। मतलब ये अपराध करने पर कोई सजा नहीं होगी, लेकिन अभी ये अपराध गैरकानूनी या अवैध बने रहेंगे। बिल में साफ है कि इन अपराधों के लिए न कोई सजा होगी और न ही कोई जुर्माना वसूला जाएगा। हालांकि कुछ नियम ऐसे हैं जिसमें सजा खत्म कर दी गई है, लेकिन जुर्माना लगता रहेगा।

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2023 में 183 अपराध हुए थे सजा मुक्त

केंद्र सरकार ने इससे पहले 2023 में जन विश्वास (संशोधन) बिल पास किया था। इसमें 19 मंत्रालय और विभागों ने 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। सरकार ने इसके पीछे का उद्देश्य बताया कि इससे जीवन और व्यापार सुगम बनेगा।

लाल किले से पीएम मोदी ने किया था जिक्र

15 अगस्त के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से नेक्सट जनरेशन रिफॉर्म की बात की थी। पीएम मोदी ने इसमें पुराने नियमों को अगली पीढ़ी के हिसाब से बदलने के लिए टास्क फोर्स का ऐलान किया था। कहा था कि हमारे देश में कई ऐसे कानून हैं, जिसमें छोटी-छोटी बातों पर भी जेल की सजा का प्रावधान है। कहा था कि ऐसे अनावश्यक कानून, जो भारतीय नागरिकों को जेल में डालते हैं, समाप्त किए जाएं। हमने पहले भी संसद में एक विधेयक पेश किया था। हम इसे इस बार फिर से लेकर आए हैं।

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