अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अब इजरायल ने लेबनान पर भीषण हमले शुरू कर दिए हैं जिससे मध्य पूर्व में हालात बेहद खराब हो गए हैं. इजरायली हमलों में लेबनान के आम नागरिकों की मौत के बाद भारत की तीनों सेनाएं हाई अलर्ट मोड पर आ गई हैं क्योंकि जहां यह हमला हुआ है वह ‘ब्लू लाइन’ का इलाका है. इजरायल और लेबनान के बीच की इस सीमा पर संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के तहत भारत के करीब 600 सैनिक तैनात हैं. मेजर जनरल एसके सिंह ने बताया कि भारतीय सेना की एक इन्फेंट्री बटालियन वहां शांति बनाए रखने के लिए मोर्चा संभाले हुए है और रक्षा मंत्रालय लगातार उनके संपर्क में बना हुआ है.
बंकरों में रहने के निर्देश और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ब्लू लाइन के 120 किलोमीटर लंबे दायरे में भारतीय सैनिकों के साथ-साथ 50 अन्य देशों के सैनिक भी शांति दूत बनकर तैनात हैं. ताजा हमलों के बाद सेना के सूत्रों ने जानकारी दी है कि भारतीय जवानों को फिलहाल बंकरों में ही रहने का सख्त निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके. स्थिति सामान्य होने तक जवानों को सभी जरूरी काम बंकर के भीतर से ही करने को कहा गया है. सुरक्षा के मद्देनजर जवान अब बख्तरबंद गाड़ियों से पेट्रोलिंग कर रहे हैं और बुलेटप्रूफ जैकेट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि सुरक्षा घेरे को और मजबूत किया जा सके.
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क्या होता है यूएन शांति मिशन और भारतीय सैनिकों का काम
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तहत बहाल इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दो देशों के बीच युद्धविराम को बनाए रखना और दोबारा हिंसा को रोकना है. भारतीय सैनिक वहां किसी दबाव में नहीं बल्कि एक ग्लोबल मिशन के हिस्से के रूप में काम करते हैं जहां उनका काम घायलों की मदद करना और हिंसा प्रभावित लोगों को बचाना है. इसके अलावा युद्ध क्षेत्र में रोजमर्रा के सामानों की सप्लाई सुनिश्चित करना और शांति समझौते को जमीन पर लागू करवाना भी इन सैनिकों की बड़ी जिम्मेदारी होती है. साल 2024 में भी इजरायली हमलों के दौरान कुछ शांति सैनिक जख्मी हुए थे जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी चेतावनी जारी की गई थी.
लेबनान में तैनात भारतीय सैन्य दल की ताकत
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार लेबनान में भारत के कुल 50 अधिकारी और 550 सैनिक तैनात हैं जो मुख्य रूप से ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट से संबंध रखते हैं. इस दल में केवल थल सेना ही नहीं बल्कि आर्मर्ड, इंजीनियर्स, सिग्नल, मेडिकल और एयर डिफेंस के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है ताकि हर परिस्थिति का सामना किया जा सके. जानकारों का कहना है कि शांति सैनिकों पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का गंभीर उल्लंघन माना जाता है. फिलहाल भारत सरकार की प्राथमिकता अपने बहादुर सैनिकों को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशों पर नजर रखना है.
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