दिल्ली की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद मंगलवार शाम विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों की राहुल गांधी के सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर एक अहम बैठक हुई. ‘हाई टी’ पर विपक्षी दलों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया, इसके साथ ही सरकार को आगे घेरने के लिए रणनीति तय की गई. बैठक में खास तौर पर समाजवादी पार्टी के 22 सांसद और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के सांसद मौजूद रहे. इन दोनों पार्टियों पर हाल के दिनों में लगातार सवाल उठ रहे थे कि ये गठबंधन की गतिविधियों से दूरी बनाए हुई हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, मीटिंग में विपक्षी सांसदों का मनोबल काफी ऊंचा दिखाई दिया और आने वाले दिनों के राजनीतिक एजेंडे पर गंभीर चर्चा हुई.
सीटिंग अरेंजमेंट के पीछे रणनीति
मीटिंग के दौरान करीब 40 गोल मेजें लगाई गई थीं. नेताओं के बैठने का अरेंजमेंट ऐसे किया गया था कि एक राज्य के नेता एक ही मेज पर ना बैठें. बल्कि अलग-अलग राज्यों को नेताओं के हर मेज पर मिक्स किया गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे अलग-अलग राज्यों के नेताओं में संवाद बढ़ाना मकसद था.
त्योहारों के बाद सड़क पर उतरेगा ‘INDIA’
बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सांसदों ने आने वाले दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली त्योहारों पर चर्चा की. बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए विपक्षी गठबंधन अगले कुछ दिनों तक कोई बड़ा सड़क प्रदर्शन या धरना नहीं देगा. त्योहारों के बाद विपक्ष नए सिरे से सड़कों पर उतरेगा.
CJP, AAP और चंद्रशेखर पर चर्चा
कांग्रेस समेत तमाम घटक दलों ने साफ किया कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों से गठबंधन पूरी तरह दूरी बनाए रखेगा. विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के दूरी बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर की. वहीं, समाजवादी पार्टी ने आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को गठबंधन के दायरे से बाहर रखने की अपनी मांग दोहराई.
AISA की नेहा बोरा पर भी बातचीत
बैठक का एक बड़ा चर्चा बिंदु आइसा की युवा नेता नेहा बोरा रहीं. सोमवार को जब विपक्षी नेता ट्रक पर सवार होकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब प्रियंका गांधी ने नेहा बोरा को अपने पास आगे खड़ा किया हुआ था. दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों में नेहा बोरा बड़ा चेहरा बनकर सामने आई हैं.
जंतर-मंतर पर आर-पार की जंग
बैठक में दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले की कड़ी निंदा की गई. विपक्षी नेताओं ने संकल्प लिया कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ कानूनी और सियासी दोनों स्तरों पर मजबूती से लड़ाई लड़ेंगे.