भारतीय वायुसेना की ताकत में जल्द एक और इजाफा होने वाला है. एयरफोर्स सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, फाइटर विमान तेजस MK-1A के प्रोडेक्शन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने के लिए अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस ने F404-IN20 इंजन के लिए एक करार किया गया है. ऐसा इसलिए कि इंजन की कमी के कारण तेजस की संख्या नहीं बढ़ पा रही थी. और HAL इसकी डिलिवरी करने में नाकाम हो रहा था. वायुसेना प्रमुख ने HAL चीफ से कहा भी था कि फाइटर जहाज के बिना वे कैसे युद्ध लड़ पाएंगे, इस बयान के बाद रक्षा मंत्रालय में हड़कंप मच गया था.

बता दें, अब तक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 7 नए F404-IN20 इंजन दे दिए गए हैं. और सभी इंजन को ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए हरी झंडी दे दी गई है.

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भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से टैरिफ को लेकर विवाद है. लेकिन इसी बीच अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस ने भारतीय रक्षा मंत्रालय को भरोसा दिलाया है कि साल 2026 के दिसंबर महीने तक 2 दर्जन तेजस के इंजन सौंप देगा और 2027 में 30 और इंजन की डिलिवरी कर देगा.

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अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के इस आश्वासन के बाद HAL ने नासिक में तेजस के प्रोडेक्शन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने के लिए काम कर रही है.

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मिडिल ईस्ट की लड़ाई और भविष्य के युद्ध को देखते हुए इंडियन एयरफोर्स अपने बेड़े में ज्यादा से ज्यादा फाइटर जहाज को शामिल करने का लक्ष्य रखना चाहती है. भारतीय वायुसेना ने अब तक 180 तेजस MK-1A विमानों का ऑर्डर दिया है. और यही वजह है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय GE F404 इंजन का सबसे बड़ा कस्टमर बन कर सामने आया है.

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​क्यों हो रही है परेशानी

भारतीय वायुसेना के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या टेक्नोलॉजी को लेकर है. तेजस में इजरायल की बनी हुई रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को मेक इन इंडिया के तहत बने आर्म्स और मिसाइल के सॉफ्टवेयर के बीच एक सिस्टम पर लाने में परेशानी हो रही है और इसका हल भी नहीं निकल पा रहा है.

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