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1965-71 की जंग से पहले हुई मॉक ड्रिल में क्या-क्या हुआ था? ताजा हुईं दोनों युद्धों की यादें

भारत पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ने की संभावना है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कल 7 मई के देशभर में मॉक ड्रिल होने जा रही है। मॉक ड्रिल ने एक बार फिर 1965 और 1971 के युद्धों की यादें ताजा कर दी हैं, क्योंकि सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल जंग से पहले ही की जाती है।

22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर की बैसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ। 4 आतंकियों ने 26 भारतीय पर्यटकों की गोलियां मारकर हत्या कर दी। भारत ने आतंकी हमला कराने का आरोप पाकिस्तान पर लगाया है। भारत इस कायराना हरकत का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ने को तैयार है। सेना, वायुसेना और नौसेना कई दिन से युद्धाभ्यास कर रही हैं।

भारत सरकार ने अब युद्ध से पहले होने वाली मॉक ड्रिल के आदेश भी दे दिए हैं। जी हां, कल 7 मई दिन बुधवार को देशभर के 244 जिलो में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल, प्रैक्टिस और रिहर्सल होगी और इस आदेश ने 1965 और 1971 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध से पहले हुई मॉक ड्रिल की यादें ताजा कर दीं। आइए जानते हैं कि 1965-1971 में मॉक ड्रिल में क्या-क्या हुआ था?

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दोनों युद्धों से पहले क्या-क्या हुआ था?

भारतीय सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी यादें ताजा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1971 में जब पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ था और युद्ध के दौरान जब रेड एयर सायरन बजते थे तो लोग डरकर घरों में दुबक जाते थे। ब्लैकआउट होते ही लोगों में भगदड़-सी मच जाती थी। वे जमीनों पर लेटकर रातभर पहरा देते थे। घरों की दीवारों और खिड़कियों पर काला पेंट कर दिया जाता था, ताकि दुश्मन को लाइट मारने पर भी कुछ नजर न आए।

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दिल्ली में रहने वाले रमेश ने भी अपनी युद्ध के दौरान की यादें ताजा करते हुए कई बातें बताईं। वह बताते हैं कि 1971 के युद्ध के दौरान वह बच्चे थे और स्कूल में पढ़ते थे। तब उनका परिवार मोती बाग की सरकारी कॉलोनी में रहता था, लेकिन युद्ध के कारण स्कूलों में छुट्टी कर दी गई थी। लोग ग्रुप बनाकर पूरी कॉलोनी में पहरा देते थे। किसी घर से मामूली-सी भी रोशनी आती थी तो उसे भी बंद कर दिया जाता था। हवाई जहाज देख लोग नारे लगाने लगते थे।

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एयर रेड सायरन क्या?

युद्ध के दौरान बजने वाला एयर रेड सायरन फैक्ट्री में बजने वाले सायरन की तरह ही होते हैं। सरकार की तरफ से जगहों-जगहों पर सायरन लगवाए जाते हैं। सायरन ऐसे लगाए जाते हैं कि सभी को सुनाई दें और लोग अलर्ट हो जाएं। एयर रेड सायरन का मतलब होगा कि लोग अलर्ट रहें और अपने बचाव का प्रयास करें। मॉक ड्रिल में लोगों को एयर रेड सायरन के बारे में और उसके बजने पर क्या करना है? यह सिखाया जाएगा।

ब्लैक आउट का मतलब क्या?

युद्ध के दौरान ब्लैक आउट का मतलब है, एकदम अंधेरा कर देना। घरों में, दुकानों में, गलियों में जलने वाली सभी लाइट बंद कर देना। जब एयर रेड सायरन बजेगा तो सभी को ब्लैकआउट करना है। अगर लाइट जलानी है तो खिड़कियों पर काला पेंट कर दें। काला कार्बन पेपर लगा दें। जरा-सी रोशनी भी बाहर नजर न आए। इससे दुश्मन को टारगेट नहीं मिलेगा और वह हमला नहीं कर पाएगा।

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First published on: May 06, 2025 01:44 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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