Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

देश

एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर से दुनिया का दूसरी ‘सुपरपावर’ बनेगा भारत, कलपक्कम ने रचा इतिहास, भाभा का सपना हुआ पूरा

तमिलनाडु के कलपक्कम में भारत के पहले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली है. इस अचीवमेंट के साथ भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है जिसके पास ये एड्वांस्ड परमाणु तकनीक है.

Author
Written By: Varsha Sikri Updated: Apr 7, 2026 15:20
Kalpakkam PFBR
Credit: Social Media

भारत ने न्यूक्लियर पावर के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए तमिलनाडु के कलपक्कम में मौजूद प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) को ‘क्रिटिकल’ बना दिया है. ये अचीवमेंट इसलिए बेहद खास है क्योंकि इसके साथ ही भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है जिसके पास फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) तकनीक मौजूद है. तमिलनाडु के कलपक्कम में बना ये प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की न्यूक्लियर कंपनी भाविनी (भाभा न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स) ने तैयार किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि के लिए जनता को बधाई देते हुए इसे देश की परमाणु ऊर्जा यात्रा का ऐतिहासिक और निर्णायक कदम बताया है.

क्या है PFBR और क्यों खास है?

कलपक्कम में बना ये PFBR 500 मेगावाट क्षमता का एक एड्वांस्ड परमाणु रिएक्टर है, जिसे पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत होती है कि ये जितना फ्यूल खर्च करता है, उससे ज्यादा नया परमाणु ईंधन तैयार करता है. यानी ये एनर्जी प्रोडक्शन के साथ-साथ भविष्य के लिए ईंधन भी तैयार करता है. परमाणु रिएक्टर में ‘क्रिटिकलिटी’ वो स्थिति होती है जब न्यूक्लियर फिशन रिएक्शन स्टेबल तौर से शुरू हो जाता है. ये किसी भी रिएक्टर के ऑपरेशन से पहले सबसे अहम फेज होता है. इसका मतलब है कि अब ये रिएक्टर धीरे-धीरे बिजली प्रोडक्शन के अगले फेज की ओर बढ़ेगा.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: पिता-पुत्र के हत्यारों को 6 साल बाद मिलेगा दंड, कोर्ट ने सभी 9 पुलिसकर्मियों को सुनाई मौत की सजा

भारत क्यों बना दूसरा देश?

अब तक दुनिया में सिर्फ रूस ही फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को सफलतापूर्वक ऑपरेट कर रहा था. भारत ने ये उपलब्धि हासिल कर इस हाई-एंड परमाणु तकनीक में अपनी जगह बना ली है. आपको बता दें, PFBR भारत के थ्री लेवल न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम का दूसरा फेज है. इस तकनीक के जरिए भारत अपने बड़े थोरियम भंडार का इस्तेमाल भविष्य में कर सकेगा.ये रिएक्टर प्लूटोनियम बेस्ड फ्यूल का इस्तेमाल करता है और आगे चलकर थोरियम से यूरेनियम-233 तैयार करने में मदद करेगा, जिससे एनर्जी प्रोडक्शन लंबे समय तक हो सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि PFBR की सफलता से भारत न केवल स्वदेशी परमाणु तकनीक में मजबूत होगा, बल्कि इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता भी कम होगी. इसके अलावा, ये तकनीक पर्यावरण के लिहाज से भी खास है क्योंकि ये कम कचरा पैदा करती है और ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस करती है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: तमिलनाडु चुनाव 2026: द्रविड़ राजनीति के अभेद्य किले में क्या ‘भगवा’ सेंध लगा पाएगा? क्या TVK की एंट्री से बिगड़ेगा DMK-AIADMK का खेल?

First published on: Apr 07, 2026 12:10 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.