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अन्नामलाई के BJP छोड़ने से कैसे बदली तमिलनाडु की सियासत? जानिए- BJP पर क्या पड़ेगा असर

तमिलनाडु में असली चुनौती युवाओं के वोट बैंक को लेकर खड़ी हो गई है. सूबे में करीब 1.18 करोड़ युवा मतदाता हैं, जिन्हें लुभाने के लिए इस समय बड़ा राजनीतिक दांव खेला जा रहा है.

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पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई के भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़ने के बाद दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है. अन्नामलाई के पार्टी से अलग होते ही उनके समर्थन में कई राज्य स्तरीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा से अपने इस्तीफे का एलान कर दिया है. ये सभी समर्थक अब अन्नामलाई के नए ‘स्वयंसेवक आंदोलन’ का हिस्सा बनने जा रहे हैं.

इस बड़े घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में एक गंभीर बहस छेड़ दी है – क्या आक्रामक राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले अन्नामलाई का जाना तमिलनाडु में भाजपा के बढ़ते आधार को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा, या फिर पार्टी इस झटके से उबर जाएगी?

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आंकड़ों में अन्नामलाई का सफर

इसमें कोई दो राय नहीं है कि साल 2020 की शुरुआत में जब भाजपा ने अन्नामलाई को आगे बढ़ाया, तो राज्य में पार्टी की विजिबिलिटी काफी बढ़ गई. 2022 के निकाय चुनाव में अन्नामलाई के नेतृत्व में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़कर चेन्नई के 20 से अधिक वार्डों में दूसरा स्थान हासिल किया और मजबूत मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक (AIADMK) को तीसरे नंबर पर धकेल दिया.

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2024 का लोकसभा चुनाव में इसी हौसले के दम पर बीजेपी 2024 में अकेले चुनावी मैदान में उतरी. पार्टी को करीब 11% वोट शेयर तो मिला, लेकिन वो एक भी सीट जीतने में नाकाम रही. हालांकि, कई सीटों पर उसने AIADMK को तीसरे स्थान पर बनाए रखा.

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लेकिन जब बात व्यक्तिगत चुनावी जीत की आई, तो अन्नामलाई का जादू आंकड़ों में नहीं बदल सका. वे 2021 का विधानसभा चुनाव अरवाकुरिची सीट से करीब 24 हजार वोटों से हार गए और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर सीट पर भी द्रमुक (DMK) के हाथों उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.

BJP क्या बोल रही?

पार्टी के भीतर मची इस भगदड़ और टूट की खबरों के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है. उन्होंने कहा, ‘अन्नामलाई के बाहर निकलने से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और हमारे पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा कद्दावर नेता है. मैं बाकी नेताओं से अपील करता हूं कि वे किसी अन्य आंदोलन में जाने के लिए पार्टी न छोड़ें.’

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‘त्रिकोणीय’ मुकाबला

तमिलनाडु में असली चुनौती युवाओं के वोट बैंक को लेकर खड़ी हो गई है. सूबे में करीब 1.18 करोड़ युवा मतदाता हैं, जिन्हें लुभाने के लिए इस समय बड़ा राजनीतिक दांव खेला जा रहा है. अभिनेता से नेता बने विजय अब सूबे के मुख्यमंत्री हैं और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता सातवें आसमान पर है. वहीं, उदयनिधि स्टालिन को द्रमुक (DMK) अगली पीढ़ी के सबसे बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है. इनके अलावा 42 वर्षीय अन्नामलाई अब भाजपा से अलग होकर अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी में हैं, जिससे वे युवाओं के एक बड़े हिस्से को अपने पाले में ला सकते हैं.

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7 महीने बाद होना है असली फैसला

अन्नामलाई का व्यक्तिगत राजनीतिक वजूद कितना मजबूत है और उनके जाने से बीजेपी को जमीनी स्तर पर कितना नुकसान हुआ है, इसका पहला असली टेस्ट अगले 7 से 8 महीनों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में देखने को मिलेगा. चुनाव ही तय करेंगे कि तमिलनाडु में भाजपा दूसरे नंबर की लड़ाई में बनी रहेगी या फिर से हाशिए पर चली जाएगी.

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First published on: Jun 06, 2026 08:52 PM

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