K Annamalai Networth: भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई, नई राजनीतिक पारी की तैयारी करते नजर आ रहे हैं. उनके समर्थकों ने राज्य में नई पार्टी बनाने और अलग से अभियान शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, खबरें ये भी हैं भाजपा ने फिलहाल उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है और उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं. जानते हैं कि अन्नामलाई कितनी संपत्ति के मालिक हैं?
अन्नामलाई की कुल संपत्ति कितनी?

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2024 में भाजपा से लोकसभा चुनाव लड़ चुके अन्नामलाई IPS से लेकर नेता तक का सफर तय कर चुके हैं. ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की साल 2024 की रिपोर्ट अनुसार, अन्नामलाई की कुल संपत्ति 4 करोड़ 7 लाख 26 हजार 627 रुपये है. चल संपत्ति 2 करोड़ 42 लाख 26 हजार 627 रुपये है. जबकि, अचल संपत्ति 1 करोड़ 65 लाख रुपये है.
2011 बैच के IPS अन्नामलाई

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41 साल के अन्नामलाई साल 2011 बैच के कर्नाटक कैडर से IPS यानी भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे. मई 2019 में उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था. इस दौरान वह उडुपी समेत कई जिलों में पुलिस अधीक्षक रहे. जब उन्होंने इस्तीफा दिया, तब वह बेंगलुरु दक्षिण में उपायुक्त के पद पर थे. वह बताते हैं कि एक वरिष्ठ अधिकारी स्वाइन फ्लू से मौत और कैलाश मानसरोवर की यात्रा ने उनके फैसले पर बहुत असर डाला था.
आखिर क्यों छोड़ रहे भाजपा

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टीवीके के उभार से विपक्षी खेमे में होने के बावजूद भाजपा और उसके सहयोगी अन्नाद्रमुक को बड़ा झटका लगा था. इसके बाद से अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन के विरोधी रहे पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई जल्द ही भाजपा छोड़कर नए दल का गठन कर सकते हैं. सूत्रों ने लिखा कि शाह से मुलाकात के बाद अन्नामलाई ने संकेत दिए हैं कि वह कुछ समय इंतजार कर सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई ने इस्तीफा नहीं दिया, लेकिन भूमिका स्पष्ट न होने पर पार्टी छोड़ने की बात जरूर रखी है.
भाजपा का इस्तीफा से मना

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सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन व गृह मंत्री अमित शाह के सामने अपनी भावी भूमिका को लेकर चर्चा की है. भले ही वह पार्टी अध्यक्ष न बनाए जाएं, लेकिन कार्ययोजना उनकी रहे, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने इससे साफ इंकार कर दिया है और कहा कि वह अपनी नई भूमिका के लिए इंतजार करें. उन्हें वही करना होगा जो पार्टी उनके लिए तय करेगी.
राज्य में ही रहना चाहते हैं

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दरअसल भाजपा नेतृत्व उनको केंद्र की राजनीति में लाना चाहता है, जबकि अन्नामलाई राज्य की राजनीति में अपनी कार्ययोजना के अनुसार काम करना चाहते हैं. चूंकि तमिलनाडु में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कोई अहम चुनाव भी नहीं है, ऐसे में भाजपा वहां पर अपनी रणनीति को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती है, बल्कि खुद की जमीन तो मजबूत करना चाहती है.