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Explainer: IAS अधिकारी कितने दिनों में वापस ले सकता है अपना इस्तीफा? यहां जानें पूरी प्रक्रिया

IAS अधिकारी द्वारा इस्तीफा देने के बाद क्या उसे वापस लिया जा सकता है? सर्विस रूल्स के तहत इस्तीफे की वापसी और इसकी समय सीमा को लेकर क्या हैं कड़े नियम?

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Written By: Raja Alam Updated: Apr 2, 2026 12:21

यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर ने प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक बार इस्तीफा देने के बाद कोई अधिकारी अपनी नौकरी पर वापस लौट सकता है. ऑल इंडिया सर्विसेज के नियमों के मुताबिक आईएएस, आईपीएस या आईएफएस अधिकारी अपना इस्तीफा वापस ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए कुछ कड़े प्रावधान और समय सीमा तय की गई है. नियम यह कहता है कि अगर कोई अधिकारी अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहता है, तो उसे इस्तीफा सौंपने के 90 दिनों यानी 3 महीने के भीतर लिखित में आवेदन देना होगा. यह समय सीमा अधिकारी को सोच-विचार करने और भविष्य का फैसला लेने के लिए दी जाती है.

इस्तीफे की कानूनी प्रक्रिया और मुख्य शर्तें

ऑल इंडिया सर्विसेज के रूल 5(1) और 5(1)(ए) के तहत इस्तीफे की प्रक्रिया काफी लंबी और तकनीकी होती है. नियम के अनुसार, अधिकारी का इस्तीफा पूरी तरह बिना किसी शर्त के होना चाहिए और उसमें पद छोड़ने की असली वजह का साफ उल्लेख होना जरूरी है. जब भी कोई आईएएस इस्तीफा देता है, तो वह उसे संबंधित राज्य के मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) को भेजता है. वहीं, आईपीएस अधिकारी अपना इस्तीफा राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सौंपते हैं. हालांकि, इस्तीफा मंजूर करना या न करना पूरी तरह राज्य के हाथ में नहीं होता. राज्य सरकार केवल शुरुआती जांच करती है और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के पाले में होता है.

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यह भी पढ़ें: ‘बिना काम के वेतन लेना मंजूर नहीं’, UP कैडर के IAS रिंकू राही ने सिस्टम से तंग आकर दिया इस्तीफा

राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका

इस्तीफा मिलने के बाद राज्य सरकार यह जांच करती है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई सतर्कता मामला (विजिलेंस केस), बकाया राशि या कोई विभागीय जांच लंबित तो नहीं है. अगर अधिकारी पर कोई जांच चल रही होती है, तो आमतौर पर इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाता है. सभी औपचारिकताओं को पूरा करने और विजिलेंस क्लीयरेंस मिलने के बाद ही राज्य सरकार इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को भेजती है. आईएएस के मामले में इस्तीफे को मंजूरी देने वाली अंतिम अथॉरिटी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) होती है. एक बार जब डीओपीटी की तरफ से इस्तीफा मंजूर हो जाता है और प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो उसे वापस लेना नामुमकिन हो जाता है.

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किन स्थितियों में नहीं मिल सकती वापसी की अनुमति?

इस्तीफा वापस लेने के अधिकार पर कुछ खास पाबंदियां भी लगाई गई हैं ताकि सेवा की गरिमा बनी रहे. ऑल इंडिया सर्विस रूल्स के मुताबिक, अगर किसी अधिकारी ने इस मंशा से त्यागपत्र दिया है कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल होगा या चुनाव लड़ेगा, तो उसे अपना इस्तीफा वापस लेने का कानूनी हक नहीं दिया जाता. रिंकू सिंह राही के मामले में उन्होंने अपनी पुरानी सेवा (पीसीएस) में वापस भेजे जाने की मांग की है, जो इस पूरी प्रक्रिया को और भी पेचीदा बना देती है. प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से इस्तीफा देने और मूल सेवा में वापसी की मांग के बीच का रास्ता पूरी तरह नियमों की व्याख्या और सरकार के रुख पर निर्भर करता है.

First published on: Apr 02, 2026 12:21 PM

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